मनाली (कुल्लू)। मनाली सहित ऊझी घाटी में बुधवार शाम से दियाली उत्सव शुरू हो गया है। देवताओं के स्थलों में मशालें जलने के बाद हर घर में शल्ली (तेल वाली लकड़ी) को लौ जली और पूरी घाटी लौ से जगमगा उठी।
अब दियाली के अवसर पर ओल्ड मनाली, बड़ाग्रां, नग्गर सहित कई गांवों में गनेड़ उत्सव का आयोजन होगा। वीरवार को गांवों में टोलियां अखरोट उठाने के लिए घर-घर निकलीं। अखरोट के लिए ग्रामीणों में खूब जद्दोजहद देखने को मिली। नग्गर के जगतीपट्ट में पूरी घाटी शल्ली की रोशनी से जगमगा उठी।
मशाल जलने की रस्म पूरी होते ही मनाली की समस्त घाटी में स्थानीय उत्सव दियाली की शुरुआत हो गई। इस दियाली को अनोखी दिवाली भी कहा जाता है, क्योंकि लोग गांव की परिक्रमा कर गालियां देते हैं और बुरी शक्तियाें को गांव से दूर भगाते हैं। ओल्ड मनाली, बराण, बड़ाग्रां, जगतसुख, कटराईं और नग्गर में गनेड़ उत्सव भी मनाया जाएगा।
इस दौरान दो गांवों के लोग घास की रस्सी से प्रतियोगिता आयोजित करेंगे। मान्यता के अनुसार प्रतियोगिता जीतने वाला गांव धन धान्य से परिपूर्ण होता है। घाटी के ग्रामीण रतन, जसवंत, सुरेश, गोपी, कमलेश, चरण दास, दिले राम, केशव राम, टिक्कम और वेद राम ने बताया कि वे सदियों से इस अनूठी दियाली को मनाते आ रहे हैं।
वीरवार को ग्रामीणों ने गांव की परिक्रमा की और गालियां देकर राक्षसाें और बुरी शक्तियों को गांव से भगाया। इस दौरान घर-घर में अखरोट फेंके गए, जिन्हें उठाने के लिए खूब जद्दोजहद हुई। शाम को मशाल जलाने के बाद ग्रामीण देवता के परिसर में इकट्ठा हुए। इस दौरान जूब देकर आशीर्वाद लिया।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खबर इस इलाके में देरी से मिली थी। इस कारण उत्सव भी देरी से मनाया जाता है। राक्षसों और बुरी आत्माओं को भगाने के लिए दियाली उत्सव में अश्लील जुमले गाने की भी परंपरा है। संवाद