रिहायशी इलाकों में नजर आ रहे हैं वन्य जीव
वन्य प्राणियों का शीत मरूस्थल में बढ़ रहा कुनबा
संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। शीत मरूस्थल लाहौल में वन्य प्राणियों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। लाहौल में महिला मंडलों की जागरूकता के चलते शिकार पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। ऐसे में वन्य जीव टंगरोल आदि रिहायशी इलाकों में दिखना आम सी बात हो गई है।
जोबरंग और जसरथ गांव के बीच का पहाड़ तो बिना जंगल के सूना है, लेकिन यहां कई तरह के जीव-जंतु देखने को मिल रहे हैं। लाहौल में ही दारा पहाड़ पर दो हिम तेंदुए आमने-सामने कैमरे में कैद हुए हैं। बीते शुक्रवार को वाइल्डलाइफ के शौकीन अमीर जस्पा , दीपेंद्र ओथंगबा और प्रीतम सिंह ने जोबरंग और जसरथ के बीच दारा की पहाड़ी पर एक साथ आमने- सामने बैठे दो हिम तेंदुए को अपने कैमरे में कैद किया। हालांकि 9 दिन पहले ही फूड़ा गांव के प्रीतम सिंह ने इसी दारा फाल की पहाड़ पर बर्फ में भागते एक हिम तेंदुआ को फेसबुक लाइव के माध्यम लोगों को दिखाया था। पिछले महीने आठ फरवरी को ही दारा फाल से लगते जोबरंग की तरफ इसी पहाड़ पर स्थानीय शोधार्थी दीपेंद्र ओथंगबा ने दो, तीन आईबैक्स ( टंगरोल) के बीच एक हिमालयन थार को अपने कैमरे में कैद किया था। 19 फरवरी को ही इसी पहाड़ पर दीपेंद्र ओथंगबा और अमीर जस्पा ने रापे गांव से करीब 2000 मीटर दूर जोबरंग की पहाड़ पर हिम तेंदुए को अपने कैमरे में कैद किया था।
घाटी के लोग पहले यहां हिम तेंदुआ होने की बातों से ही संतुष्ट रहते थे, लेकिन अब इसके यहां होने के पुख्ता सबूत मिल रहे हैं। वन्यजीवों में हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, हिमालयन थार, तिब्बतियन बुल्फ, घोरल, काला एवं भूरा भालू सहित कई प्रजाति के वन्यजीव शोधार्थियों के कैमरे में कैद हुए हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
लाहौल में बर्फ और ठंड के मौसम में कई प्रजाति के जीव-जंतु होने के पुख्ता सबूत मिल रहे हैं। बड़ी बात तो यह भी है कि लाहौल में लोग इन प्राणियों से किसी तरह का छेड़छाड़ या नुकसान भी नहीं पहुंचाते है।
- अनिकेत मारुति वानवे, वन मंडलाधिकारी, लाहौल