भले ही सामरिक महत्व के चलते मनाली-लेह मार्ग रोहतांग में बर्फ के चलते बंद हो, बावजूद इसके लाहौल घाटी के तांदी-संसारी नाला-किश्तवाड़ - जम्मू होते हुए पठानकोट के रास्ते अभी जुड़ा है। टैक्सी चालक लाहौल से जम्मू होते हुए पठानकोट के रास्ते तीस घंटे सफर कर कुल्लू-मनाली पहुंच रहे हैं।
वहीं जरूरतमंद लोग भी इसी रास्ते से होकर लाहौल आ रहे हैं। हालांकि इस रास्ते से होकर आवाजाही करना आसान काम नहीं है। उदयपुर से पांगी घाटी के किलाड़ तक मार्ग कच्चा और खस्ताहाल होने के कारण हर समय दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। रोहतांग दर्रा बंद होने और समय पर हेलीकॉप्टर सेवा नहीं होने से लोग मजबूरन तीन से चार हजार रुपये प्रति सीट खर्च कर लाहौल से जम्मू मार्ग होते हुए पठानकोट के रास्ते कुल्लू-मनाली पहुंच रहे हैं।
पहली बार लाहौल के लिए जम्मू से अब तक सब्जियों की खेप पहुंच रही है। लोगों के अनुसार लाहौल के तांदी से संसारीनाला से किश्तवाड़ जम्मू मार्ग पर सरकार ध्यान दें तो लाहौल घाटी कुछ समय छोड़कर सालभर शेष विश्व से जुड़ी रह सकती है। सड़क की दुर्दशा हालत पर लोग इस रास्ते से जान जोखिम में डालकर मजबूरन सफर करने को विवश रहते हैं।
लाहौल घाटी के लोगों का कहना है कि तांदी-संसारीनाला-किश्तवाड़-जम्मू के बीच मार्ग के हालात चकाचक की किए जाए तो लाहौल के लोग इसी रास्ते से घाटी से बाहर निकल सकेंगे। लाहौल-स्पीति के विधायक एवं एसटी कमीशन के उपाध्यक्ष रवि ठाकुर ने कहा कि वे इस मार्ग की दशा को सुधारने के लिए केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष प्रस्ताव रखेंगे।