कुल्लू / खराहल। लहसुन के व्यापारी किसानों के घर-घर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन दाम पर बात न बन पाने से व्यापारी खाली हाथ ही लौट रहे हैं। किसानों ने उचित दाम के इंतजार में लहसुन को स्टोर करना शुरू किया है। व्यापारी कई चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन किसान बेहतर दाम नहीं मिलने के कारण उत्पाद नहीं बेच रहे हैं।
लहसुन उत्पादक अमित, अनूप, दवेंद्र, रविंद्र, ज्ञान ठाकुर, श्याम चंद और जय चंद ने कहा कि व्यापारी उचित दाम नहीं दे रहे हैं। मंडियों में 90 से 100 रुपये किलो लहसुन बिक रहा है। लहसुन की फसल को उगाने में नौ महीने का समय लगता है और इसका बीज भी 150 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से खरीदा है। खाद, बीज, मजदूरी काफी महंगी हो चुकी है। अच्छे दाम नहीं मिलते हैं तो इसकी खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
जिले में 1,500 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती हो रही है। इस साल लहसुन की पैदावार अच्छी है। हिमाचल के लहसुन की डिमांड विदेशों में अधिक रहती है। दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा मांग होती है। खासियत यह है कि अधिक टिकाऊ और गुणवत्ता से भरपूर होती है। बंदरोल सब्जी मंडी के आढ़ती नूतन ठाकुर ने कहा कि मंडी में ए क्लास का लहसुन 100 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रहा है। अभी लहसुन किसान मंडी में कम ही ला रहे हैं। जिले में करीब 14000 मीट्रिक टन उत्पादन होता है और साल करोड़ों का कारोबार होता है।