नए साल का जश्न मनाने के लिए कुल्लू और लाहौल-स्पीति की वादियों में उमड़ी भीड़
रोजाना आ रहे 30,000 सैलानी, बंजार के जिभी, सोझा, तीर्थन घाटी में होमस्टे चल रहे पैक
रोशन ठाकुर
कुल्लू। जलोड़ी दर्रा से लेकर 16,000 फीट ऊंचे शिंकुला दर्रा की साफ हवा का आनंद लेने के लिए सैलानियों की भीड़ उमड़ रही है। दिल्ली के साथ मैदानी इलाकों में छाने वाले घने कोहरे में लोगों का दम घुटने लगा है।
ऐसे में नए साल का जश्न मनाने के लिए पर्यटक पहाड़ों की ओर दौड़े आ रहे हैं। क्रिसमस के बाद कुल्लू-मनाली में सैलानियों की आमद में वृद्धि हुई है। जिले में रोज करीब 30,000 सैलानी आ रहे हैं।
बंजार के जिभी, सोझा, तीर्थन घाटी में होमस्टे पैक चल रहे हैं। मणिकर्ण, कुल्लू और मनाली के होटलों की ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी तक पहुंच गई है।
घाटी में हर दिन 4,200 से अधिक पर्यटक वाहनों की एंट्री हो रही है। बंजार घाटी में रोजाना 600, पार्वती घाटी में 1,100 और मनाली में करीब 2,500 वाहन प्रवेश कर रहे हैं। आपदा के बाद गति पकड़ रहे पर्यटन को देखकर कारोबारियों के चेहरे खिल गए हैं। कारोबारी राजेंद्र प्रकाश, ललित कुमार, गौतम ठाकुर, किशन ठाकुर ने कहा कि क्रिसमस के बाद से पर्यटन कारोबार में उछाल आया है। फेडरेशन ऑफ हिमाचल होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र ठाकुर ने कहा कि आपदा ने घाटी के पर्यटन को गहरे जख्म दिए हैं। क्रिसमस के बाद नए साल के जश्न के लिए पर्यटक बड़ी मात्रा में आ रहे हैं। विंटर सीजन में भी इस तरह के पर्यटन चलने की उम्मीद है।
जाम से सड़कों पर रेंग रहे वाहन
कुल्लू। भारी पर्यटकों के आने से जाम भी लग रहा है। बंजार से सोझा, भुंतर से मणिकर्ण, बंजार से गुशैणी और मनाली के रांगड़ी से लेकर मनाली शहर में जाम लगना आम हो गया है। पर्यटक वाहनों के साथ निगम की बसें और छोटे वाहन सड़कों पर रेंगते नजर आ रहे हैं। हालांकि इसके लिए पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात किए हैं लेकिन हजारों वाहनों से आने से सड़कों पर दबाव बढ़ गया है। इससे आम लोगों के साथ पर्यटकों को भी अपने होटलों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।