कुल्लू। मौसम की बेरुखी का असर न सिर्फ किसानों-बागवानों पर पड़ा है जबकि पर्यटन कारोबार भी प्रभावित हुआ है। क्रिसमस, नववर्ष के बाद पहाड़ सूखे ही रहे। विश्व प्रसिद्ध सोलंगनाला की स्की ढलान स्कीइंग के लिए बर्फ के इंतजार में है।
मनाली की वादियों में बर्फ न होने से पर्यटन कारोबार को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। मनाली में क्रिसमस बिना बर्फ के ही निकल गया। इसके बाद नववर्ष, लोहड़ी और अब मकर संक्रांति भी हो गई लेकिन बर्फबारी का सूखा खत्म नहीं हुआ है। बर्फबारी होने पर सोलंगनाला और अन्य स्नो प्वाइंट पर काफी अधिक चहल-पहल रहती थी।
इन दिनों सैलानी अटल टनल रोहतांग होकर लाहौल की वादियों की ओर रुख कर रहे हैं। वीकेंड को छोड़कर कम संख्या में ही पर्यटक नजर आ रहे हैं। यही हाल मणिकर्ण घाटी के तहत आने वाले पर्यटन स्थल कसोल, मणिकर्ण का है। हालांकि मलाणा में भी चुनिंदा पर्यटक जा रहे हैं। बंजार की जिभी, तीर्थन घाटी में भी मौसम की बेरुखी के चलते पर्यटकों की संख्या बढ़ नहीं रही है।
क्रिसमस पर कुल्लू-मनाली में एक लाख, नववर्ष पर 70,000 से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। मणिकर्ण घाटी के होटलियर शेर सिंह नेगी ने कहा कि क्रिसमस, नववर्ष के बाद लोहड़ी और मकर संक्रांति पर बर्फबारी न होने से मौसम ने निराश किया है। मनाली, कुल्लू और बंजार की वादियों में आने वाले पर्यटक बर्फ के फाहे गिरते देखने का सपना पूरा नहीं कर पाए।
मौसम की बेरुखी का असर पर्यटन कारोबार पर भी पड़ रहा है। आने वाले दिनों बर्फबारी होने पर कुल्लू-मनाली में बेहतर कारोबार होने की उम्मीद है। संवाद
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लाहौल जाने का एकमात्र विकल्प
सैलानियों को अब बर्फ लाहौल में ही देखने को मिल रही है। सैलानी बर्फ देखने के लिए लाहौल जा रहे हैं। आसमान से बर्फ गिरते देखना सैलानियों का सपना रहता है।