तीर्थन घाटी में झरने के पास फोटो खिंचवाता हुए एक पर्यटक। झरने पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने
कलवारी और श्रीकोट में पर्यटकों की दस्तक
सुंदर स्थलों तक पहुंचना अभी भी चुनौती भरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार (कुल्लू)। उपमंडल में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के अंतर्गत आने वाली तीर्थन घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। तीर्थन घाटी में प्राकृतिक झरने पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
तीर्थन की दूरदराज पंचायत श्रीकोट में कई अनछुए स्थल मौजूद हैं। यहां बहुत कम सैलानी पहुंच पाए हैं। पंचायत के अंतर्गत प्राचीन गांव शनाड़, शपनील, अनाह, कनौन और हुरी, सराची झरना, भरयाडा झरना और गलयाडा झरना बेहद खूबसूरत हैं। स्थानीय भाषा में इन झरनों को छो कहा जाता है।
पर्यटक इन झरनों के पास सुकून के पल बिता रहे हैं। गौर रहे कि अगस्त में प्राकृतिक आपदा के बाद तीर्थन घाटी में पर्यटन गतिविधियां पटरी पर लौट रही हैं। यहां आने वाले पर्यटक केवल विश्राम ही नहीं, बल्कि कुछ नया देखने और दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर रोमांचक अनुभव प्राप्त करने के लिए भी उत्सुक नजर आ रहे हैं। पर्यटन कारोबारी मोहर सिंह ठाकुर ने कहा कि तीर्थन के ऊंचे पहाड़ों पर नदी-नालों, झरनों, झीलों और खड्डों का विस्तृत जाल फैला है। भीड़-भाड़ और शोरगुल से दूर यहां का सौंदर्य हर थकान को भुला देता है। हालांकि, इन सुंदर स्थलों तक पहुंचने वाले रास्तों की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। आपदा के बाद रास्ते अभी तक दुरुस्त नहीं हो सके हैं। सड़क और पैदल मार्गों में सुधार किया जाए तो तीर्थन के झरनों में सालभर पर्यटकों का तांता लगा रहेगा। दिल्ली के आए पर्यटक विवेक और आकाश ने कहा कि झरने की कल-कल करती आवाज प्रकृति के साथ एकात्म होने का अहसास करवाती है।