केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान केंद्र गड़सा तथा चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा की ओर से गड़सा घाटी के दुर्गम गांव भलाण में कृषि विज्ञान प्रदर्शनी एवं किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान में भलाण और आसपास के गांवों के करीब 50 पचास किसानों ने हिस्सा लिया, जिसमें बीस ग्रामीण महिलाएं भी मौजूद रहीं। गोष्ठी में किसानों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
इसके साथ ही केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान की ओर से निर्मित ऊनी उत्पाद एवं पशु आहार के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. सुरेंद्र कुमार ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि किसानों की आत्मनिर्भरता एवं मजबूती के लिए उन्हें पारंपरिक ज्ञान के साथ तकनीकी ज्ञान देना आवश्यक है। गड़सा केंद्र के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. ओमहरि चतुर्वेदी ने कहा कि पशुधन कृषि तथा पशुपालन हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने पशुओं में नस्ल सुधार, खिलाई पिलाई एवं प्रबंधन की जानकारी दी।
डॉ. देवव्रत सेठी नेे भेड़ पालन के लाभ एवं संस्थान किसान सहभागिता द्वारा कृषि तकनीक के विकास से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना जताई। पशुु विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. दीपाली कपूर और उद्यान विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. रमेश कुमार राणा, कीट विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. रमेश लाल ने भी किसानों के साथ अपने विचार साझा किए। भलाण गांव के किसानों ने केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान केंद्र गड़सा के अधिकारियों को किसान गोष्ठी आयोजित करने के लिए धन्यवाद किया।