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कुल्लू अस्पताल में बच्चों के लिए तीन वार्ड बनाए

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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात शिशु। -संवाद - फोटो : Kullu
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में बच्चों का हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) और सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में उपचार किया जा रहा है। अस्पताल में बच्चों के उपचार के लिए नई व्यवस्था की गई है।
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अस्पताल के मातृ-शिशु खंड में स्थापित ओपीडी में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। वहीं अस्पताल के पुराने भवन में बच्चों को उपचार के लिए भर्ती किया जा रहा है। इस भवन में तीन वार्डों में बच्चों का उपचार किया जा रहा है। चिल्ड्रन वार्ड के अलावा एसएनसीयू और एचडीयू वार्ड में भर्ती बच्चों को बेहतर उपचार की सुविधा मिलेगी। हालांकि अस्पताल में चार माह बाद बच्चों का उपचार शुरू हुआ है। इससे पहले शिशु रोग विशेषज्ञ न होने से अस्पताल के वार्डों और ओपीडी में ताला लटका था। अब बच्चों का उपचार किया जा रहा है।
गौरतलब है कि तीनों वार्डों में बच्चों के 33 बिस्तरों की व्यवस्था है। इसके अलावा उपचार के लिए आठ रेडिएंट वार्मर (बच्चों को गर्म रखने के लिए) भी हैं। इस समय में अस्पताल में 21 बच्चे उपचाराधीन हैं। इनमें 11 बच्चे चिल्ड्रन और दस बच्चे एनएससीयू और एचडीयू में भर्ती हैं। बता दें कि लंबे समय के बाद शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने से परिजनों को बच्चों के उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। रोजाना अस्पताल की ओपीडी में 100 से 120 बच्चों का उपचार किया जा रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश ने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक बच्चों का उपचार करने के लिए तैनात हैं।
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अस्पताल में बच्चों का उपचार एचडीयू, एनएससीयू और चिल्ड्रन वार्ड में किया जा रहा है। एचडीयू में फोटोथैरेपी, इंफ्यूजन पंप, ऑक्सीमीटर, जांच उपकरणों और एनएससीयू में रेडिएंट वार्मर, एक्यूरेटर और चौबीस घंटे ऑक्सीजन की सुविधा है।
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डॉ. तेंजिन, शिशु रोग विशेषज्ञ, कुल्लू
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