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तीसरी लहर का खतरा, कुल्लू में छह माह से शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं

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संवाद न्यूज एजेेंसी
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कुल्लू। देश में कोरोना की दूसरी के बाद अब तीसरी लहर का डर सता रहा है। इतना ही नहीं इस लहर में बच्चों के चपेट में होने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन जिला कुल्लू के साथ जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में एक भी शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। लाहौल-स्पीति के लोग अपने बच्चों को उपचार के लिए कुल्लू अस्पताल लेकर हैं। लेकिन क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में करीब छह महीनों से शिशु रोग विशेषज्ञ के दोनों पद खाली चल रह हैं।
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शिशु रोग ओपीडी में ताला लगा हुआ है। अपने बच्चों के उपचार के लिए कुल्लू अस्पताल आने वाले लोग मजबूरी में निजी अस्पताल जाने को मजबूर हैं। निजी अस्पताल में उन्हें महंगा उपचार करवाना पड़ रहा है। कुल्लू जिले के साथ लाहौल-स्पीति, चंबा जिले के पांगी, मंडी जिले के द्रंग, सराज विधानसभा क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने वाले क्षेत्रीय अस्पताल की सुध लेने वाला कोई नहीं है। अस्पताल प्रबंधन भी डॉक्टरों के मसले को लेकर गंभीर नहीं है। प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर भी कुल्लू जिले से ही संबंध रखते हैं। शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर भी कुल्लू अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञों की तैनाती करवाने में विफल रहे हैं। सरकार की इस अव्यवस्था को लेकर आम लोगों में भारी रोष है। घाटीवासी रविंद्र कुमार, अशोक, नरेश और लाल चंद ने कहा कि जब दूरदराज क्षेत्रों से लोग उपचार के लिए अपने बच्चों के साथ अस्पताल में पहुंचते हैं तो यहां उन्हें निराशा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ की जल्द तैनाती की जाए। उधर, इस संबंध में एसएमओ डॉ. नीना लाल ने कहा कि डॉक्टर के आदेश हुए थे। लेकिन उन्होंने ज्वाइन ही नहीं किया।
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