जिले में आपदा और विभिन्न हादसों ने 91 परिवारों के उजड़े आशियाने
264 परिवारों के आशियानों को आंशिक क्षति, दूसरों के घरों में ली शरण
गौरीशंकर
कुल्लू। कैलेंडर का आखिरी पन्ना पलटने वाला है। जिले के लिए वर्ष 2025 ऐसा दौर बन गया जिसने लोगों से उनका सब कुछ छीन लिया। किसी की जान चली गई तो किसी से जीवन भर की जमा-पूंजी और सिर की छत छीन ली।
इस साल आपदाओं और अलग-अलग हादसों ने 85 परिवारों को पीड़ा दी। 91 परिवारों के घर पूरी तरह उजड़ गए। बाढ़, बादल फटना, भूस्खलन और दुर्घटनाओं ने न सिर्फ गांवों की तस्वीर बदली, बल्कि सैकड़ों परिवारों की जिंदगी की दिशा भी बदल दी। इन लोगों के पास रहने के लिए घर तक नहीं बचा है। साथ ही 264 परिवार ऐसे हैं जिनके आशियानों को आंशिक क्षति पहुंची है। उन्हें भी छोड़कर दूसरों के घरों में शरण लेनी पड़ी। आज भी घर खोने वाले लोग अपना जीवन बसाने की राह देख रहे हैं। सरकार की ओर से मुआवजा देने को घोषणाएं की गईं। मुआवजा देना भी शुरू कर दिया है लेकिन धरातल पर अभी तक ऐसी स्थिति नहीं बन पाई है कि वे फिर से आशियाने बना सकें। कई परिवारों के पास मकान बनाने के लिए जमीन तक नहीं बची है।
जिले में भूस्खलन से गई 21 लोगों की जान
इस वर्ष भूस्खलन से 21 लोगों की मौत हुई है। डूबने से 9, फिसलन से 7, बाढ़ से 1, करंट और आग की घटना में 1-1, बिजली गिरने से 3, पेड़ से गिरने पर 7, गिरने से 5 और सड़क हादसों में 27 लाेगों की जान गई है। साथ ही श्रीखंड महादेव यात्रा में भी एक श्रद्धालु की मौत हुई है। इससे परिजनों को कभी न भरने बाले जख्म मिले हैं। इससे यह वर्ष जिले के लिए दिल दहलाने वाला रहा है।
बाढ़ की चपेट में आए दो लोग अभी लापता
जिले में हुईं घटनाओं में जान गंवाने वालों में हालांकि अधिकतर लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं लेकिन सैंज घाटी के जीवा नाला में आई बाढ़ में एक महिला और एक पुरुष अभी तक लापता हैं। रिश्ते में दोनों भाई-बहन थे। मकान के साथ नदी में बह गए थे। उनके साथ एक युवती भी थी। उसका शव कुछ दिन बाद मलबे से निकाला गया था लेकिन भाई-बहन का अभी कोई पता नहीं चला है।