दशकों से लटके नौतोड़ और एफआरए के मामलों को मिलेगी राहत
आठ दशक पुराना रिकाॅर्ड होगा अपडेट, लट्ठा-मुसाबी होगी डिजिटल
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। करीब 75 साल बाद लाहौल घाटी में बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। हालांकि, कायदे से हर 40 साल बाद बंदोबस्त की प्रक्रिया अपनाई जाती है, लेकिन जनजातीय क्षेत्र लाहौल में 1950-51 के बाद बंदोबस्त नहीं हुआ है।
सरकार ने लाहौल में बंदोबस्त शुरू करने के लिए बाकायदा अधिसूचना जारी कर दी है। बंदोबस्त की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबे अरसे से लटके नौतोड़ और एफआरए के मामले जल्द निपटने की उम्मीद है। विभाग सिस्सू से बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। बंदोबस्त के लिए कुल्लू से राजस्व विभाग की विशेष टीम आएगी। बंदोबस्त के बाद घाटी में हजारों बीघा अपरिमेय भूमि की नए सिरे से पैमाइश के साथ इसका वर्गीकरण होगा।
जीपीएस से होगा बंदोबस्त
जरेब जैसे परंपरागत औजार के बजाय बंदोबस्त की प्रक्रिया पूरी करने में अब इलेक्ट्रॉनिक टोटल सिस्टम और ग्लोबल पॉजीशनिंग सिस्टम की मदद ली जाएगी। जरेब से होने वाली पैमाइश में कई मीटर के अंतर आने का दावा किया जाता रहा है। जीपीएस किसी स्थान की सटीकता उपलब्ध करवाता है। इस विधि से 15 मीटर तक की पैमाइश में केवल एक से तीन सेंटीमीटर तक का अंतर आता है।
रिकाॅर्ड होगा अपडेट, लट्ठा-मुसाबी होगी डिजिटल
बंदोबस्त के बहाने लाहौल राजस्व विभाग का लगभग 80 साल पुराना रिकाॅर्ड अपडेट होने के साथ मुसाबी और लट्ठा डिजिटल फॉर्म में उपलब्ध होगा। राजस्व रिकाॅर्ड के अब फटने और गुम होने का भी डर नहीं रहेगा। लोगों को अब पूरा रिकाॅर्ड एक क्लिक पर मिलेगा।
लाहौल में जैसे ही मशीनें पहुंचेंगी, बंदोबस्त का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस संदर्भ में अधिसूचना जारी हो चुकी है। -डाॅ. चिरंजीलाल, सहायक बंदोबस्त अधिकारी