मणिकर्ण घाटी के किसानों-बागवानों को राहत देने के लिए एपीएमसी का निर्णय
पिछले साल बाढ़ में बह गया था सब्जी मंडी का परिसर और तीन मंजिला भवन
पुरानी सब्जी मंडी से कुछ दूर निजी भूमि में संचालित की जाएगी अस्थायी मंडी
गौरीशंकर
कुल्लू। मणिकर्ण घाटी के लोगों को अपने फल और सब्जी उत्पाद बेचने के लिए लंबी दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। एपीएमसी ने शाट के पास ही निजी भूमि में अस्थायी सब्जी मंडी चलाने का निर्णय लिया है।
घाटी के किसान-बागवान अपने उत्पाद इस सब्जी मंडी में बेच सकेंगे। दरअसल, सब्जी मंडी शाट का आधा परिसर और तीन मंजिला भवन बाढ़ में बह गया था। इस कारण यहां सब्जी मंडी चलाना सुरक्षित नहीं है। जब तक नदी के किनारे सुरक्षा दीवार नहीं लग जाती, तब तक मंडी संचालित करना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए एपीएमसी ने निर्णय लिया है कि इस सब्जी मंडी से कुछ दूर निजी भूमि में अस्थायी तौर पर सब्जी मंडी चलाई जा सकती है। ऐसे में इस बार इस निजी भूमि पर अस्थायी तौर पर सब्जी मंडी खोली जाएगी। इससे किसानों-बागवानों को अपने उत्पाद भुंतर या कलैहली मंडी नहीं ले जाने पड़ेंगे।
एक दर्जन पंचायतों को मिलेगा फायदा
शाट सब्जी मंडी से मणिकर्ण घाटी की करीब 12 पंचायतों को फायदा पहुंच रहा था। एक अगस्त, 2024 को मलाणा नाला में मलाणा-एक और मलाणा दो प्रोजेक्ट के बांध टूटने से आई बाढ़ ने क्षेत्र में तबाही मचा दी थी। मलाणा नाला के साथ पार्वती के रौद्र रूप से शाट की सब्जी मंडी का आधा परिसर और तीन मंजिला भवन तहस-नहस हो गया था। घाटी के लोगों के पास सब्जी मंडी का क्षेत्र में विकल्प नहीं था। किसानों-बागवानों के पास अपने उत्पाद भुंतर, कुल्लू या कलैहली मंडी ले जाना ही विकल्प था, लेकिन अब एपीएमसी ने वैकल्पिक तौर पर तहस-नहस हुई सब्जी मंडी से कुछ दूरी पर मंडी चलाने का निर्णय लिया है।
घाटी के किसानों-बागवानों की सुविधा के लिए पुरानी सब्जी मंडी से कुछ दूर अस्थायी तौर पर सब्जी मंडी चलाने का निर्णय लिया है। जब तब पुरानी सब्जी मंडी रिस्टोर नहीं हो जाती, तब तक वैकल्पिक तौर पर अस्थायी मंडी लगेगी। - शगुन सूद, सचिव, एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल स्पीति