केलांग (लाहौल-स्पीति)। दिव्यांग बच्चों के जीवन में थेरेपी सेवाओं का महत्व है। समय पर दी जाने वाली फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, विशेष शिक्षा और अन्य पुनर्वास सेवाओं से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में काफी सुधार लाया जा सकता है। इससे वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं। यह बात सोमवार को डॉ. तनु शर्मा ने कही।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) तांदी में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से जुड़े विषयों पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों को समावेशी शिक्षा के बारे में जागरूक करना रहा।
इस कार्यक्रम में सांफिया फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रबंधक बीजू हिमदल और डॉ. तनु शर्मा (फिजियोथेरेपिस्ट) मुख्य वक्ता रहे। बीजू हिमदल ने कहा कि स्कूल, परिवार और समाज के सहयोग से दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना संभव है और इसके लिए जागरूकता तथा सहयोग बहुत जरूरी है। समग्र शिक्षा समन्वयक छेरिंग अंगरूप ने बताया कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, सहायक उपकरण उपलब्ध करवाने, विशेष शिक्षकों के माध्यम से सहयोग देने तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के प्रयास किए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। संवाद