लाहौल और कुल्लू में गर्मियों के मौसम में लोगों को नहीं सताएगी पेयजल की कमी
फरवरी की बर्फबारी से ग्लेशियरों को संजीवनी मिलने के साथ पेयजल स्रोत भी रिचार्ज
बलदेव राज
कुल्लू। फरवरी में हुई बर्फबारी से ग्लेशियरों को संजीवनी मिली है। ग्लेशियरों पर चार से पांच फीट बर्फ की परत बिछ गई है। इससे गर्मियों में पेयजल का संकट दूर हो गया है।
लाहौल और कुल्लू में पेयजल को लेकर किल्लत पेश नहीं आएगी। कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिले में फरवरी शुरू होने तक लोग परेशान हो गए थे। दिसंबर से जनवरी तक औसत ही बर्फ गिरी थी। लोगों को चिंता थी कि इस बार गर्मियों में पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। कई पेयजल स्रोतों में आपूर्ति 50 फीसदी तक कम हो गई थी। फरवरी में जिस तरह पहाड़ों पर बर्फ गिरी, उससे ग्लेशियर और पेयजल स्रोत रिचार्ज हो गए हैं। किसानों-बागवानों की परेशानी भी दूर हो गई है।
गौर रहे कि कुल्लू और लाहौल में पेयजल योजनाओं के स्रोत नदी-नालों से हैं। सूखे जैसे हालात होने पर पेयजल योजनाओं पर असर पड़ता है। लाहौल से कुल्लू तक भारी बर्फबारी से ग्लेशियरों को संजीवनी मिली है। पेयजल स्रोत भी रिचार्ज हुए हैं। पेयजल स्रोतों को बर्फबारी और बारिश से संजीवनी मिली है। मार्च में अभी कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिले में बारिश और बर्फबारी होने की उम्मीद है। बहरहाल, बर्फबारी से जिस तरह संकट दूर हुआ है, उससे अब गर्मियों के दौरान पेयजल की चिंता नहीं सताएगी।
बर्फबारी और बारिश से पेयजल स्रोतों को संजीवनी मिली है। इससे गर्मियों के दौरान पेयजल को लेकर समस्या पेश नहीं आएगी।
- विनोद ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग
जिले में हैं करीब 900 से अधिक पेयजल योजनाएं
कुल्लू जिले के उपमंडल बंजार, आनी, निरमंड, कुल्लू और मनाली में करीब 900 से अधिक पेयजल योजनाएं हैं। इनका संचालन जल शक्ति विभाग कर रहा है। इनसे हजारों की आबादी को फायदा भी मिल रहा है।