कुल्लू और लाहौल-स्पीति में बारिश न होने से ठप पड़ी गेहूं और मटर की बिजाई
बागवानी के काम भी ठप, घाटी में ऊंची चोटियों में बर्फबारी तक सीमित रहे बादल
शुष्क ठंड ने बढ़ाई लोगों की परेशानी, वायरल की चपेट में आ रहे जिले के लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जब काले बादल घाटियों में उतरे तो किसानों ने राहत की सांस ली लेकिन कुछ ही घंटों में मौसम साफ होते ही उम्मीदें भी छंट गईं।
कुल्लू और लाहौल में बारिश न होने से गेहूं और मटर की बिजाई से लेकर बागवानी के जरूरी काम ठप पड़ गए हैं। किसानों-बागवानों का कहना है कि बादल छाए तो जरूर लेकिन अंत में फिर धोखा दे गए। अब बारिश के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति समेत कुल्लू में मौसम खुल गया है। दो दिन मौसम खराब होने के बाद सोमवार को धूप खिली। घने काले बादल लाहौल और मनाली की ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी तक ही सीमित रहे। कुल्लू और लाहौल में बारिश की उम्मीदें अधूरी रह गईं। ऐसे में बारिश के लिए अभी इंतजार करना होगा।
अक्तूूबर के पहले सप्ताह में जिले में बारिश हुई थी। लंबे अंतराल से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। शुष्क ठंड लोगों को परेशान कर रही है। लोग वायरल की चपेट में आ रहे हैं। कृषि और बागवानी के कार्य भी सूखे जैसे हालात के बीच ठप हैं। किसानों ने बिजाई के लिए गेहूं और मटर का बीज कृषि प्रसार केंद्रों से खरीदा है। खेतों में नमी न होने से किसान बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, बागवानी के कार्य भी ठप हैं। बगीचों में नमी की कमी से तौलिये बनाने का कार्य रुक गया है। किसान रेवत राम ठाकुर और दौलत राम ने कहा कि आसमान में उमड़े घने बादलों को देखकर लगा था कि इस बार बारिश होगी लेकिन बादल पहाड़ों में बर्फबारी तक ही सीमित रहे। देवी-देवताओं के दरबार जाकर भी लोग बारिश की गुहार लगा रहे हैं।
उधर, फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के अध्यक्ष लाल चंद ठाकुर ने कहा कि बारिश की इस समय किसानों और बागवानों को सख्त जरूरत है। बारिश न होने के कारण रबी फसल की बिजाई में देरी हो रही है। बारिश के बाद बिजाई सुचारू हो सकेगी।