कुल्लू के भुंतर स्कूल में ऐक्टिव मोनाल कल्चरल संस्था की नाट्य कार्यशाला के समापन पर नाटक मंचन
भुंतर (कुल्लू)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भुंतर के विद्यार्थियों ने छुआछूत और जात-पात की प्रवृत्ति पर कुठाराघात किया। विद्यार्थियों ने मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित नाटक ‘ठाकुर का कुआं’ का भावपूर्ण मंचन किया और समाज में फैली जात-पात की कुरीति पर सवाल उठाए। नाटक में जोखू जो अनुसूचित जाति से संबंध रखता है, बहुत बीमार है।
वह पानी पीना चाहता है, लेकिन लोटे में भरे पानी में बदबू है। इसका कारण कुएं में किसी जानवर का मरना रहा। दूसरा कुआं ठाकुर का है, जिसमें केवल सवर्ण जाति के लोग ही पानी भर सकते हैं। जोखू की पत्नी गंगी ठाकुर के कुएं से पानी चुराने की कोशिश करती है, जबकि जोखू उसे मना करता है। कहता है कि बहुत ज्यादा खतरा है। ठाकुर के आदमियों ने पकड़ लिया तो हमें पुश्तों तक जीने नहीं देंगे। वह अपने बीमार पति को गंदा पानी नहीं पिला सकती।
रात के समय वह कुएं से पानी भरकर बर्तन ऊपर खींचती है। उसी वक्त ठाकुर की आवाज आती है कौन है। गंगी से बर्तन वहीं छूट जाता है और वह बेसुध भागती है। घर आकर देखती है, तो जोखू वही गंदे पानी का लोटा मुंह से लगाकर पानी पी रहा होता हैं। वह देखती ही रह जाती है और सोचती है कि यह वर्ग भेद और जाति पाति की खाई हमारे समाज में कभी पाटी भी जा सकेगी? इस नाटक को 21 दिनों की कार्यशाला में तैयार किया गया। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन कुल्लू सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निशुल्क रंगमंच का प्रशिक्षण दे रही है और उन्हें प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान कर रही है। संवाद