सैंज घाटी के देहुरी में सूख कर खराब हुई धान की फसल। संवाद
न्यूली (कुल्लू)। घाटी के देहरी में देव परंपरा से पांच बीघा से अधिक भूमि पर की गई धान की खेती पूरी तरह से खराब हो गई है। यहां लाल चावल की खेती देव रिवायत के अनुसार की गई थी लेकिन यह धान की फसल तैयार होने से पहले ही सूखकर खराब हो गई है। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।
किसानों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब क्षेत्र में धान की फसल इस तरह से पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसानों की मानें तो क्षेत्र में लाल चावल की खेती सदियों से होती आ रही है।
घटना को कुछ लोग आपदा से जोड़कर देख रहे हैं जिसमें तर्क दिया जा रहा है कि इस बार अधिक बरसात होने के कारण फसल खराब हुई होगी जबकि कुछ लोग इसे देवी-देवताओं के रूष्ट होने से भी जोड़कर देखने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि देहुरी में हर साल देवता पुंडीर ऋषि और दुर्गा माता मंदिर की मौजूदगी में देव समाज के लोग रूहणी मेला मनाने के लिए एकत्रित होते हैं और धान की रोपाई करते हैं।
पांच बीघा से अधिक क्षेत्र में धान की रोपाई की जाती है। इस बार भी यहां रूहणी मेले के माध्यम से हारियानों ने रोपाई की थी। गंगेराम, चुन्नी लाल और हरफी राम के इन खेतों में देव परंपरा का निर्वहन कर धान रोप दिया गया परंतु यह धान खेतों में तैयार होने से पहले ही सूखकर खराब हो गया। संवाद