मनाली। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा एवं महायज्ञ के दौरान कथा व्यास शंशाक कृष्ण कौशल ने मां पार्वती के अवतार और उनके कठोर तप का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर साधना की थी।
कथा व्यास ने कहा कि पर्वतों और हिमालय की कंदराओं को हमारे ऋषि-मुनियों और देवी-देवताओं ने तप, साधना और भजन के लिए चुना था लेकिन आज कई धार्मिक स्थलों को केवल ट्रैकिंग और मनोरंजन के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। मंदिर और तीर्थ स्थल केवल घूमने-फिरने या मौज-मस्ती के लिए नहीं बल्कि श्रद्धा, दर्शन और आत्मिक शांति प्राप्त करने के लिए हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखें और वहां सच्चे मन व आध्यात्मिक भाव से पहुंचें। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा के साथ माता के दरबार में पहुंचकर उनका स्मरण करें तो वे जीवन के अनेक बंधनों से मुक्त हो सकते हैं।
कथा के दौरान मां वैष्णो देवी की महिमा का भी गुणगान किया गया। वक्ता ने कहा कि माता अपने भक्तों को स्वयं बुलाती हैं और जिन पर उनकी कृपा होती है, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
इस अवसर पर भक्तिरस से सराबोर भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मां रे मां मुझे मूर्त दे दे, शिव शंकर की मूर्त दे दे, माता जिनको याद करे, वो लोग निराले होते हैं, चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
पूरे पंडाल में जय माता दी के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे का अभिवादन भी जय माता दी कहकर किया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और देर तक भक्ति और श्रद्धा में डूबे रहे।