सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। घाटी के आराध्य देवता राजा घेपन की मलाणा यात्रा दूसरे दिन रविवार सुबह पौने सात बजे डिंफुक से शुरू हुई। राजा घेपन छत्र के साथ जाहलमा की माता हिडिंबा और मारबल के देव 18 नाग के साथ यात्रा कर रहे हैं।
विज्ञापन
इस बीच डिंफुक वासियों ने शगुन में कलछोर निकाल कर डिंफुक से देवता और यात्रा में शामिल हारियानों को विदा किया। इस दौरान रामथांग वासियों ने भी देवताओं के आगे शीश नवाए और आशीर्वाद लिया।
साढ़े तीन घंटे की रोहतांग दर्रे की खड़ी चढ़ाई को पार कर देवलू रोहतांग दर्रा पहुंचे। यहां पहुंचकर गूर और बाट ने पूजा अर्चना की और फिर मढ़ी होते हुए कुलंग पहुंचे। यहां कुलंग के जमदग्नि ऋषि से भी नौ साल बाद उनका भव्य देव मिलन हुआ। संवाद