बंजार घाटी के गांव ग़रुली फागली उत्सव के दौरान मुखौटा पहनकर नृत्य करते ग्रामीण।-संवाद
बंजार के तिंदर गांव में फाल्गुन संक्रांति पर रही फागली उत्सव की धूम
बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं ने किया प्राचीन परंपराओं का निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार (कुल्लू)। बंजार के तिंदर गांव में फाल्गुन संक्रांति पर भगवान विष्णु नारायण को समर्पित प्राचीन मुखौटा उत्सव (फागली) धूमधाम से मनाया गया।
इस दौरान देवता की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक मुखौटा नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए।
गौर रहे कि तीर्थन घाटी में मुखौटा उत्सव फागली की धूम है। दूरदराज क्षेत्रों के हर गांव में यह पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है। तिंदर गांव में मनाए गए उत्सव के दौरान अतिथियों को पारंपरिक व्यंजन चिलडू परोसे गए। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया। स्थानीय लोगों का मानना है कि फागली उत्सव से गांव में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है।
लिहाजा, घाटी में इस उत्सव के दौरान परंपरागत संस्कृति के दर्शन हुए और लोगों ने पुरातन संस्कृति की झलक पेश की। जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव टीसी महंत ने कहा कि फागली उत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, लोक संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष श्रद्धा के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व बंजार और तीर्थन घाटी की पहचान को और सशक्त बनाता है।