मकानों में दरारें आने से कई परिवार स्कूल और रिश्तेदारों के घरों में ले चुके हैं शरण
जायजा लेने पहुंची प्रशासनिक टीम के सामने पहाड़ी से गिरी चट्टान ने डराए लोग
लोग बोले- दरारें आने से रहने लायक नहीं बचे घर, जिला मुख्यालय से भी कटा संपर्क
भूमि में भी लगातार आ रहीं दरारें, 19 परिवारों ने खाली किए घर, 40 पहुंचा आंकड़ा
राजीव नैय्यर
कुल्लू। लगघाटी में बागन गांव की जिंदगी इस समय पहाड़ की चट्टानों और दरारों के बीच दांव पर लगी है। शुक्रवार को प्रशासनिक टीम के सामने ही चट्टानें खिसकने और गांव के पास आकर टूटने से अफरातफरी मच गई।
ग्रामीणों के घरों में दरारें पड़ चुकी हैं और अब उनका अस्तित्व खतरे में है। इस भयावह स्थिति से उबरने के लिए गांव वाले शरणार्थी बनकर विद्यालयों और रिश्तेदारों के घरों में ठिकाना बनाने को मजबूर हैं। गांव के 35 से 40 घरों के दरारें आ गई हैं।
शुक्रवार को प्रशासनिक टीम जायजा लेने पहुंची। इस दौरान एक बड़ी चट्टान खिसक कर तेजी से पेड़ों को उखाड़ते हुए गांव की ओर आ गई। गनीमत रही कि चट्टान एकाएक दो-फाड़ हो गई। इससे उसकी रफ्तार कम हो गई।
गांव में लोगों के घर रहने लायक नहीं बचे हैं। इनमें एक से चार इंच तक दरारें आ गई हैं। भूमि में लगातार दरारें आ रही हैं। गत वीरवार तक 19 परिवारों ने घर खाली कर दिए थे। शुक्रवार तक यह आंकड़ा 40 के करीब पहुंच गया। गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। गांव तक पहुंचने के लिए दो से ढाई घंटे की खड़ी चढ़ाई, ऊबड़-खाबड़ और जोखिम भरे रास्ते से जाना पड़ रहा है।
भारी बारिश के कारण घरों में दरारें आ गई हैं। पूरे गांव पर ढहने का खतरा है। कई परिवारों को घर छोड़ कर विद्यालय और रिश्तेदारों के घरों में शरण ली है। इन जगहों पर भी कितने दिन रह पाएंगे। - गुनी देवी, निवासी बागन
बागन गांव के साथ बढ़ई नाला बहता है। इस कारण भूमि कटाव लगातार जारी है। इसका तटीकरण होने से गांव को बचाया जा सकता है। घरों में दरारें आने का कारण नाले के जलस्तर से भूमि कटाव होना है। -विजय, निवासी बागन
जिला मुख्यालय से बागन गांव को जोड़ने वाली कुल्लू-बढ़ई-पीज सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त हुई है। इससे गांव का संपर्क कट गया है। दो दिन और बारिश रही तो ग्रामीणों तक राशन कैसे पहुंच पाएगा। -कर्ण, निवासी बागन