कुल्लू दशहरा उत्सव के समापन अवसर पर निकली भगवान की रघुनाथ यात्रा।-संवाद
दशहरा में देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेने के लिए एक सप्ताह तक जुटे रहे श्रद्धालु
देवी-देवताओं के देवायलों में लौटने से श्रद्धालुओं के चेहरों पर दिखी मायूसी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में एक सप्ताह (दो से आठ अक्तूबर) तक भगवान रघुनाथ और 262 से अधिक देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
दशहरा में भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का आना-जाना रहा। लंका दहन की परंपरा का निर्वहन होते ही देवी-देवताओं ने अपने स्थायी देवालयों का रुख कर लिया। इससे श्रद्धालुओं के चेहरों पर मायूसी और भावुकता दिखी। अब उन्हें दोबारा एक साल का लंबा इंतजार इस पल के लिए करना होगा। देवी-देवताओं के लौटने से अठारह करड़ू सौह का नजारा फिर बदल गया।
हालांकि, भगवान रघुनाथ और आराध्य देवी-देवताओं के दर्शन पाने के लिए एक सप्ताह तक श्रद्धालुओं की कतारें लगीं रहीं। अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ की एक झलक पाकर श्रद्धालु लालायित हुए। अस्थायी शिविर में भी गत छह दिन भजन-कीर्तन का दरबार सजा। भजन-कीर्तन का दौर रात तक चलने से रघुनाथ का दरबार भक्ति से सराबोर रहा। दूसरी ओर, देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में अपने आराध्यों के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। देवी-देवताओं के महाकुंभ के अस्थायी शिविरों में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का आना-जाना हर दिन लगा रहा। बहरहाल, अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की अठारह करडू सौह (ढालपुर) एक ऐसा स्थान है। इसमें श्रद्धालु रोजाना सैकड़ों देवी-देवताओं के एक साथ दर्शन कर पाते हैं लेकिन अब उन्हें दोबारा एक साल का लंबा इंतजार करना होगा।