कुल्लू में व्यावसायिक परिसर में दुकानों की नीलामी से कारोबारियों ने खींचे हाथ
31 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में सिर्फ 11 ही हुईं आवंटित, 20 रह गईं खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा व्यावसायिक परिसर में कारोबार करने से व्यापारी खौफ खाने लगे हैं। पहली बार काफी ऊंची बोली लगाने के बाद व्यापारियों की ओर से छोड़ी गईं दुकानों में कारोबार शुरू करने की हिम्मत कम ही व्यापारी दिखाते दिख रहे हैं।
दूसरी बार व्यावसायिक परिसर की 31 दुकानों के लिए अपनाई गई नीलामी प्रक्रिया में सिर्फ 11 ही दुकानें आवंटित की गई हैं जबकि 20 दुकानें शेष रह गई हैं। इनके लिए कम ही व्यापारियों ने रुचि दिखाई। इस कारण ये नीलाम नहीं हो पाईं। कुछ दुकानें तो ऐसी थीं जिनके लिए एक भी कारोबारी नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने नहीं आया। अधिकतर दुकानें ऐसी थीं जिनके लिए तीन से कम लोगों ने आवेदन किया था। इस कारण उनकी बोली नहीं हो पाई। कायदे से नीलामी प्रक्रिया में तीन आवेदन आने जरूरी होते हैं।
गौरतलब है कि यह व्यावसायिक परिसर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसमें लाडा का भी शेयर लगाया गया है। ऐसे में इस परिसर को जिला प्रशासन और नगर परिषद कुल्लू संयुक्त रूप से चलाएगी। गौर रहे कि पिछली बार 10 नंबर दुकान 1 लाख 36 हजार रुपये में नीलाम हुई थी। यह जीएसटी के साथ डेढ़ लाख रुपये प्रति महीना पड़ रही थी लेकिन यह दुकान इस बार सिर्फ 36500 रुपये में ही नीलाम हुई है।
कौन सी दुकान कितने में नीलाम
व्यावसायिक परिसर में दुकान नंबर एक 51,500 रुपये प्रति महीने के किराये की दर पर नीलाम हुई। सात नंबर 8,800 रुपये, 8 नंबर 42500, 10 नंबर 36500, 11 नंबर 46000 रुपये, 16 नंबर 49000 रुपये, 17 नंबर 26000 रुपये, 19 नंबर 18000 रुपये, 23 नंबर 22500, 30 नंबर 6000 रुपये, 32 नंबर 22000 रुपये में नीलाम हुई। व्यावसायिक परिसर में 9 दुकानें आरक्षित की गई हैं। इनमें एक ही दुकान नीलाम हुई।
बीस दुकानों के लिए फिर होगी नीलामी
अब शेष बचीं बीस दुकानों के लिए फिर से नीलामी प्रक्रिया करने की योजना है। सात दुकानें पहले ही नीलाम हो चुकी है। कुल मिलाकर 37 दुकानों के परिसर में अब तक 18 दुकानें ही नीलाम हुई हैं। यह अभी 50 फीसदी से भी कम है।
जो दुकानें शेष रह गई हैं, उनके लिए फिर से नीलामी प्रक्रिया करवाई जाएगी। यह प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी ताकि सभी दुकानें नीलाम हो सकें। व्यापारी अपनी दुकानें खोल सकें। - सचिन, कनिष्ठ अभियंता, नगर परिषद कुल्लू