तांदी अग्निकांड ... प्रभावित परिवारों के 120 लोगों के लिए सर्दियों के तीन महीने निकालना मुश्किल
खेती-बाड़ी पर निर्भर तांदी गांव के लोगों के लिए परिवार के साथ पशुधन की भी सता रही चिंता
नया घर बनाना किसी चुनौती से कम नहीं, सरकार-प्रशासन से मिलने वाली मदद को बतार रहे नाकाफी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बंजार के तांदी गांव में सुलगी आग देखते ही देखते लोगों के आशियाने निगल गई। अब प्रभावित परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कड़ाके की ठंड के तीन महीने गुजारना है।
भीषण आग से प्रभावित 33 परिवारों को नया आशियाना बनाने की भी चिंता सताने लगी है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मिलने वाली मदद को भी पर्याप्त नहीं बताया। खेती-बाड़ी पर निर्भर प्रभावितों का कहना है कि परिवार के साथ पशुधन को संभालना उनके लिए बड़ी चुनौती है।पशुओं के चारे के लिए रखी घास भी आग की भेंट चढ़ गई है। कहा कि घर बनाने के लिए अगर सरकार आवास योजना के तहत मदद भी करती है तो इसमें मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं होगी। स्थानीय पंचायत प्रधान परस राम, ग्रामीण यज्ञ चंद, हेतराम ठाकुर और हेमचंद ने कहा कि घाटी में धीरे-धीरे पर्यटन गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। इसके लिए कई लोगों ने होमस्टे बनाने के सपने संजोए थे। भीषण अग्निकांड ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
तांदी गांव जैसे दुर्गम क्षेत्र में ग्रामीणों ने मुश्किल से मकान बनाए थे। आशियाना तैयार करने में कई वर्ष लगए गए। इनमें अधिकतर घर पुश्तैनी और काष्ठकुणी शैली से बने थे। आधे से ज्यादा गांव अब राख के ढेर में बदल चुका है। सारी संपत्ति तीन घंटे में जलकर राख हो गई।
पशुओं के लिए भी तैयार करना होगा बसेरा
प्रभावित ग्रामीण हेम सिंह, चेतन सिंह, लोत राम, रमेश कुमार और डोलू देवी ने कहा कि उन्हें खुद के लिए छत के अलावा पशु के लिए भी बसेरा तैयार करना मुश्किल है। बेघर होने के बाद ग्रामीणों के सामने नए आशियाना बनाने और संसाधन जोड़ने की चुनौती है। दुर्गम गांव में सरकार की ओर से मिलने वाली राहत पर्याप्त नहीं है।