ऐतिहासिक 700 साल पुरानी चैहणी कोठी। संवाद
16वीं शताब्दी में हुआ है नौ मंजिला बनी काष्ठकुणी शैली की कोठी का निर्माण
राजा डाढी ठाकुर ने रानी की स्मृति में किया था इस ऐतिहासिक मंजिल का निर्माण
चार अप्रैल 1905 को कांगड़ा में आए भूंकप को होंगे 120 साल
पिछले दिनों म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप से चिंतित हुए लोग
रोशन ठाकुर
कुल्लू। पिछले सप्ताह म्यांमार और थाईलैंड में आए विनाशकारी भूकंप ने दोनों देशों में भारी तबाही मचाई है। 7.7 तीव्रता के आए भूकंप ने पूरे विश्व को चिंता में डाल दिया है। इसी तरह का चार अप्रैल भूकंप 1905 में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में आया था। इसमें हजारों लोगों की मौत हो गई थी। चार अप्रैल 2025 को इस भूकंप को 120 वर्ष हो गए हैं।
21वीं शताब्दी में देश और प्रदेश में भूकंपरोधी भवनों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश में कई सदियों पहले ऐसे भवन बने हैं, जो आज भी इस तरह के भूकंप को सहने के बाद भी खड़े हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कुल्लू जिला के बंजार में करीब 700 साल पुरानी सात मंजिला चैहणी कोठी। वर्ष 1905 में आए 7.8 रिक्टर स्केल तीव्रता वाले भयंकर भूकंप में इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं थीं, लेकिन उस समय बनी इस नौ मंजिला चैहणी कोठी को यह भूकंप हिला तक नहीं पाया था।
कोठी की आठवीं और नवीं मंजिल में हल्की दरारें आने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें गिराया गया। पहाड़ी पर स्थित 90 फीट ऊंची ऐतिहासिक चैहणी कोठी वर्तमान में इस देवता शृंगा ऋषि का मंदिर स्थापित है। बता दें कि 1905 में आए विनाशकारी भूकंप से प्रदेश में हजारों लोगों की मौत हो गई थी। देवता शृंगा ऋषि के पुजारी इंद्र देव ने कहा कि भूकंप की तीव्रता अधिक होने से घाटी में कई मकान ढह गए थे, मगर ऐतिहासिक चैहणी कोठी का निर्माण 1276 ईसवी में यहां के आखरी शासक राजा डाढ़ी ठाकुर ने किया था। मान्यता है की राजा डाढी ठाकुर की रानी का नाम चैहनी था तो रानी की अल्प काल मृत्यु होने पर राजा ने रानी की स्मृति में नौ मंजिला इमारत का निर्माण करवाया। उसे चैहनी नाम की संज्ञा से जोड़ा गया और वर्तमान में इस चैहनी कोठी के नाम से जाना जाता है। कहा कि पर्यटन की दृष्टि से यह बहुत खूबसूरत मनमोहक है। वर्तमान में इस स्थान पर देवता शृंगा ऋषि ने योगिनियों को विराजमान करवाया है जो धार्मिक आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है।