सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं क्षेत्र के लंबे-चौड़े और खुले मैदान
मूलभूत सुविधाएं न होने से नहीं पहुंच रहे पर्यटक, ट्रैकर भी कम ही करते हैं रुख
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। शीत मरुस्थल की मयाड घाटी का थान पट्टन इलाका पर्यटकों की सैरगाह बन सकता है। कुदरत ने इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुंदरता के खजाना से नवाजा है। लंबे-चौड़े और खुले मैदान बरबस ही सैलानियों को अपनी ओर खींचते हैं।
थान पट्टन क्षेत्र की हसीन वादियां जन्नत के नजारे से कम नहीं हैं। यही वजह है कि यहां एक बार आने वाले सैलानी हर बार इस इलाके का रुख करना चाहते हैं। इस क्षेत्र में बहुत कम संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसकी वजह मूलभूत सुविधाएं नहीं होना है। पर्याप्त सुविधाएं न होने से इस घाटी तक आम पर्यटक नहीं पहुंच पा रहे हैं। न ही ट्रैकर अपेक्षाकृत पहुंच रहे हैं। दरअसल, क्षेत्र में टेलिफोन और इंटरनेट के साथ सड़क सुविधा का भी अभाव है। सरकार ध्यान दे तो यह इलाका सैलानियों की पहली पसंद बन सकता है।
इंटरनेट सुविधा, सड़क बने तो खिंचे चले आएंगे सैलानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि थान पट्टन में मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। टेलिफोन, इंटरनेट सुविधा के साथ अगर सड़क बन जाए तो पर्यटक घाटी की ओर खिंचे चले आएंगे। हट्स का निर्माण हो तो क्षेत्र में पर्यटकों को रहने के लिए सुरक्षित ठिकाना मिल जाएगा। इससे पर्यटन तो बढ़ेगा, स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा।
25 किलोमीटर का मैदानी क्षेत्र है थान पट्टन इलाका
उदयपुर से मयाड घाटी का अंतिम गांव खंजर है। यह उदयपुर से करीब 32 किमी दूर है। इससे आगे थान पट्टन का इलाका है। यह इलाका लगभग 25 किलोमीटर का मैदानी क्षेत्र है। इसकी चौड़ाई 3 से 4 किलोमीटर है। थान पट्टन एक तरफ जांस्कर और दूसरे तरफ पांगी रेंज से घिरा है। उदयपुर से खंजर तक सड़क सिंगल लेन और कच्ची है।
क्षेत्र में इंटरनेट सेवा नहीं है। इससे पर्यटकों असुविधा होती है। क्षेत्र के लिए सड़क बन जाए तो यह क्षेत्र सबसे बेहतरीन पर्यटन स्थल बन सकता है। इससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। सरकार को मूलभूत सुविधाएं जुटाने की आवश्यकता है। - धीरज ठाकुर, पर्यटन कारोबारी
क्षेत्र के लिए सुविधाएं मिलें तो यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से विकसित हो सकता है। क्षेत्र के लोगों के लिए पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के द्वार खुल जाएंगे। सरकार, प्रशासन और पर्यटन विभाग को इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की जरूरत है। - गोपाल शाशनी, पर्यटन कारोबारी