शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के साथ-साथ समाजसेवा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे शिक्षक राजेश कुमार ने क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्तमान में वह राजकीय माध्यमिक पाठशाला बाहु में टीजीटी आर्ट्स के पद पर कार्यरत हैं। उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें 15 अगस्त को कुल्लू में उपायुक्त की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।
हालांकि, उल्लेखनीय उपलब्धियों के बावजूद वह अब तक राज्य शिक्षक पुरस्कार से वंचित हैं। राजेश कुमार हिमाचल सरकार की ओर से आनी क्षेत्र के ऐसे पहले शिक्षक रहे हैं, जिनका चयन सिंगापुर में 21वीं सदी की नवीन शिक्षण पद्धतियों से संबंधित कार्यशाला के लिए हुआ था। वह बच्चों को पढ़ाने के लिए रोल प्ले और लर्निंग बाय डूइंग जैसी आधुनिक शिक्षण विधियों का प्रयोग करते हैं। विद्यार्थियों से टीएलएम तैयार करवाकर कक्षा में उसका प्रस्तुतीकरण कराया जाता है।
इससे बच्चों के लिए सीखना अधिक रोचक और आसान बनता है। बीते वर्ष उनके मार्गदर्शन और विद्यालय स्टाफ के सहयोग से विद्यालय की छात्रा अंजू ठाकुर का एनएमएमएस में चयन हुआ। वहीं, उनके विद्यालय में आने के बाद स्कूल एसएमसी ने ब्लॉक स्तर पर प्रथम और जिला स्तर पर द्वितीय स्थान हासिल किया। राजकीय प्राथमिक पाठशाला करेड़ में कार्यरत रहते हुए उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों की काउंसलिंग की और निजी विद्यालयों के 15 विद्यार्थियों को सरकारी स्कूल में प्रवेश लेने के लिए प्रेरित किया।
इस सराहनीय पहल के लिए समग्र शिक्षा कुल्लू की ओर से उन्हें 11 हजार रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। राजेश कुमार गरीब और असहाय बच्चों को समय-समय पर आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करवाते हैं। ‘बेटी है अनमोल’ कार्यक्रम के तहत वह विद्यालय की छात्राओं का जन्मदिन भी मनाते हैं। उनके पढ़ाए विद्यार्थी नवोदय, मेरिट स्कॉलरशिप, क्विज और अन्य प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं। पिछले तीन वर्षों से उनके विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षाओं में क्लस्टर स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर निजी विद्यालयों को भी पीछे छोड़ा है।