पनारसा कॉलेज में विद्यार्थियों को टांकरी लिपि पर किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
नगवाईं (मंडी)। राजकीय महाविद्यालय पनारसा में इतिहास विभाग एवं लोक संस्कृति विभाग के तत्वावधान में दस दिवसीय टांकरी लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ सोमवार को हुआ। कार्यशाला का उद्घाटन उप प्राचार्य डाॅ. चारू आहलुवालिया ने किया। संयोजक कृष्ण लाल ने बताया कि सोमवार को कॉलेज के 53 विद्यार्थियों ने भाग लिया। टांकरी लिपि विशेषज्ञ एवं शिक्षक पारुल अरोड़ा ने लिपि के इतिहास, महत्व एवं संभावनाओं के बारे में विद्यार्थियों को अवगत करवाया।
टांकरी लिपि में स्वर अक्षरों का भी अभ्यास करवाया। कहा कि टांकरी लिपि में ही हिमाचल प्रदेश की बोली भाषाएं लिखी जाती थीं। संस्कृत भाषा की भी टांकरी लिपि में पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। लोक साहित्य, इतिहास, ज्योतिष, आयुर्वेद, तंत्र, वास्तु, देवी देवताओं के मोहरों, वाद्ययंत्रों, बर्तनों, लेखन कार्य टांकरी लिपि में ही लिखा जाता था। कहा कि कश्मीर की शारदा लिपि से ही टांकरी लिपि का उद्गम हुआ है। वर्तमान में टांकरी लिपि को लिखने और पढ़ने वालों की संख्या बहुत कम है। उधर, जिला भाषा अधिकारी मंडी प्रोमिला गुलेरिया ने बताया कि टांकरी लिपि के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भाषा विभाग कार्यशालाओं का आयोजन करता है। संवाद