रोहतांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में लोग जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर सामाजिक संस्थाएं और समितियां लगातार निर्माण के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही हैं।
शुक्रवार को तांदी बांध संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से सिस्सू में मिला। प्रतिनिधिमंडल ने ने चिनाब (चंद्राभागा) नदी पर प्रस्तावित 51 छोटी-बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं का विरोध किया। समिति ने कहा कि यह इलाका औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों, बेमौसमी सब्जियों, फलों का हब बनने जा रहा है। ऐसे में जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण से विलुप्त होने वाले हिमालयन आईबैक्स, भूरा और काला भालू तथा बर्फानी तेंदुओं पर भी घातक प्रभाव पड़ेगा।
समिति के प्रधान विनोद बताते हैं कि केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है कि वह केंद्र से चिनाब घाटी में प्रस्तावित परियोजनाओं के बारे में चर्चा करेंगे। उन्होंने लाहौल घाटी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि लाहौल-स्पीति और पांगी क्षेत्र में बहने वाली चिनाब नदी और इसकी सहायक नदियों पर प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं से होने वाले सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय नुकसान की ओर केंद्रीय मंत्री ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति और पांगी घाटी का संपूर्ण क्षेत्र पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील है। यहां की भू-संरचना बहुत ही नाजुक है। इसके चलते समूचा क्षेत्र अति-संवेदनशील वर्ग में रखा गया है। भू-वैज्ञानिकों तथा हिमनद वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर घेपन घाट, समुद्र टापू, ढका तथा शिगरी आदि के टूटने की आशंका जताई है।
इससे नदी-नालों के आस-पास के क्षेत्रों में भयंकर तबाही हो सकती है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र के लोगों को विध्वंसक विकास का मॉडल स्वीकार नहीं है। इस दौरान दिग्विजय राणा, सुरेश कुमार, वीरेंद्र कुमार और अजय कुमार आदि उपस्थित रहे।