कुल्लू में फेल साबित हो रहे बेसहारा पशुओं की समस्या का समाधान करने के सभी दावे
न पंचायतें गंभीर, न ही पुलिस दर्ज कर रही कानों में टैग लगे पशु छोड़ने वालों पर मामला
बलदेव राज
कुल्लू। कड़ाके की ठंड के बीच बेसहारा पशु सड़कों पर ठिठुर रहे हैं। इनमें अधिकतर पशुओं के कानों में टैग लगे हैं। ये पशु किसके हैं, इसका पता करने के लिए न तो पंचायतें गंभीर हैं और न ही पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही है।
बेसहारा पशुओं की समस्या का समाधान करने के सारे दावे धरातल पर फेल साबित हो रहे हैं। वर्ष 2014 में पंचायतों को गोसदन बनाने के निर्देश दिए गए थे। कुल्लू में 234 पंचायतों ने गोसदन नहीं बनाए।पंचायतों ने गोसदन के लिए भूमि तक का चयन नहीं किया। प्रशासन ओर से से बैठकों में ये निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन इन पर अमल नहीं होता। जिले में अब तक 142,614 पशुओं को टैग लगाए गए हैं। टैग लगे पशु सड़क पर होने के बावजूद न तो पुलिस और न पंचायतें कार्रवाई कर रही हैं।
वर्ष 2010 में पशुओं की पहचान के लिए सरकार ने टैटूइंग करवाई थी। इसमें एक पशु के टैटूइंग करने के आठ रुपये दिए थे। इसके बाद पशु का सारा रिकाॅर्ड बनना था। पंचायतों और सरकार ने इसके बाद इसे बंद कर दिया। पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए टैग लगाए जा रहे हैं, लेकिन टैटूइंग पहचान के तौर वर्ष 2010 में ही आखिरी बार हुई थी। इसके बाद यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ गई।
उधर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुल्लू संजीव चौहान ने कहा कि पुलिस मामला सामने आने पर कार्रवाई करती है। मनाली में वर्ष 2024 में दो गो तस्करी के मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की है।
विभाग ने अब तक 1,42,614 पशुओं को टैग लगाए हैं। विभाग जिले के गोसदनों में रखे पशुओं को 700 रुपये प्रति पशु सहायता देता है। इन मवेशियों का समय-समय पर उपचार भी किया जाता है। - डॉ राजेंद्र पॉल, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग
अभी तक पंचायत ने बेसहारा पशु पंचायत क्षेत्र में पाए जाने पर किसी भी प्रकार का जुर्माना नहीं किया है। पंचायत में बेसहारा पशु नहीं हैं। ऐच्छिक निधि से इनके लिए शेड बनाया जा रहा है। यह अभी बनकर तैयार नहीं हुआ है। -घनश्याम ठाकुर, प्रधान, पंचायत तुंग
सड़कों पर नजर आने वाले मवेशी दूसरी जगह से लाए गए हैं। कई तो तीन से चार साल से घूम रहे हैं। पंचायत के अपने पशुओं का डाटा है। बेसहारा पशुओं की समस्या का समाधान सरकार कर सकती है। - सुमन पराग गौड़, प्रधान पंचायत चौकी डोभी
गर्मियों में लोग अपने मवेशी जंगलों में छोड़ देते हैं। सर्दियां शुरू होते ही ये ग्रामीण क्षेत्रों में आते हैं। इसके बाद पंचायत सहित किसानों-बागवानों के लिए समस्या बन रहे हैं। पंचायत भी इस दिशा में प्रयास कर रही है। - यमुना देवी, प्रधान, ग्राम पंचायत गाड़ापारली
हर पंचायत में गोसदन बनाना संभव नहीं है। चार से पांच पंचायतों को सामूहिक रूप से गोसदन बनाना चाहिए, जहां शेड के साथ पानी व अन्य सुविधा उपलब्ध हो। तभी लावारिस पशुओं को सही ठिकाना मिलेगा। - संतोष ठाकुर, प्रधान मुहान पंचायत, आनी