डेढ़ साल से निजी कंपनी कर रही थी संचालित, खनन विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग के साथ कार्रवाई की तैयारी कर रहा अब विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। विश्व विख्यात चंद्रताल झील के समीप बड़े पैमाने पर अवैध खनन का मामला उजागर हुआ है। करीब डेढ़ साल से संचालित हो रहे स्टोन क्रशर को शुक्रवार देर शाम खनन विभाग ने सील कर दिया है।
समुद्र तल से 14,000 फीट ऊंचाई पर कुंजुम दर्रा के पास निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से स्थापित यह क्रशर बिना अनुमति चल रहा था। खनन विभाग की कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया है।
हालांकि अब विभाग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग के साथ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। बीआरओ के अधीन ग्रांफू-लोसर-काजा सड़क चौड़ा करने का कार्य करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा है। एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को छोटा दड़ा से लोसर तक का काम आवंटित हुआ था। सड़क निर्माण के लिए कंपनी ने कुंजुम दर्रा के समीप बड़े पैमाने पर स्टोन क्रशर लगाया था। जांच में सामने आया कि कंपनी ने न तो वन विभाग से एफसीए लिया, न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी और न ही खनन विभाग की कोई औपचारिकता पूरी की। इसके बावजूद क्रशर डेढ़ साल से लगातार चल रहा था और लाखों मीट्रिक टन पत्थर क्रश कर बजरी तैयार की जा चुकी है। गौर रहे कि लाहौल-स्पीति संविधान की पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां गैर-जनजातीय लोगों को न निजी भूमि और न ही वन भूमि लीज पर दी जा सकती है। बावजूद इसके कंपनी की ओर से स्थापित यह क्रशर नियमों की खुली अवहेलना माना जा रहा है। खनन विभाग के निरीक्षक पंकज शर्मा ने क्रशर सील किए जाने की पुष्टि की है।