फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kullu News: खुद से की शुरुआत, अब 16 परिवारों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा

Sun, 16 Feb 2025 10:00 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
विज्ञापन
ग्राम पंचायत सरसेई के भाड़का गांव की प्रोमिला शर्मा, जिन्होंने प्राकतिक खेती को अपनाया। अब वे द
विज्ञापन
ऊझी घाटी के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं सरसेई पंचायत की प्रोमिला शर्मा
विज्ञापन

नुकसान के डर और परिवार वालों के विरोध पर भी नहीं छोड़ा हौसला
बलदेव राज
कुल्लू। नुकसान का डर और परिवार वालों का विरोध भी प्रोमिला शर्मा के हौसले को नहीं डिगा पाया। कामयाबी की ऐसी इबारत लिखी कि आज प्रोमिला को सभी अपना रोल मॉडल मानते हैं।
ऊझी घाटी की सरसेई पंचायत के भाड़का गांव की प्रोमिला शर्मा ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर पांच साल में ही इसका फायदा लेना भी शुरू कर दिया है। शुरुआत में उनकी डगर आसान नहीं थी। साल 2019 में उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने की बात घरवालों को बताई तो उन्होंने इंकार कर दिया। उन्हें नुकसान होने की चिंता सता रही थी। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और इस दिशा में कदम आगे बढ़ाया और घर के पास डेढ़ बीघा खेत से प्राकृतिक खेती की शुरुआत की। रासायनिक खेती के चलते खेतों में उपजाऊ क्षमता काफी कम रह गई थी। इसके बाद प्रोमिला ने खेतों में प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले जीवामृत, घनजीवामृत आदि डाला। दो से तीन साल बाद जमीन उपजाऊ बन गई। धीरे-धीरे वह अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गईं। सरसेई पंचायत के भाड़का गांव में करीब 26 परिवार रहते हैं। गांव के लोगों ने भी प्रोमिला को देखकर प्राकृतिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया। वर्तमान में गांव के 16 परिवार प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं। आसपास के गांवों के लोग भी प्रोमिला की कामयाबी को देख प्राकृतिक खेती अपनाने लगे हैं।
विज्ञापन


आत्मा के उप परियोजना निदेशक डॉ प्रदीप ठाकुर ने कहा कि जिले में 2000 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती हो रही है। कुल कृषि युक्त भूमि कुल्लू में 36,000 हेक्टेयर है। जिले में कुल 12092 किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है।


कई बार फसल में बीमारी लग जाती है तो आत्मा प्रोजेक्ट के अधिकारी आकर टिप्स देते हैं। आत्मा प्रोजेक्ट ने प्राकृतिक खेती में सहयोग दिया। प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पहले एक साल फसल होती थी और एक साल नहीं होती थी। प्राकृतिक खेती से हर साल फसल हो रही है। - प्रोमिला शर्मा, निवासी भाड़का



सेब के 370 से 420 रुपये किलो मिले थे दाम
प्राकृतिक खेती से तैयार होने वाले रूट स्टॉक के सेब की मांग इतनी अधिक है कि व्यापारी घर पर आकर इसे खरीदते हैं। साल 2024 में प्राकृतिक खेती से तैयार सेब के 370 से 420 प्रतिकिलो दाम मिले थे। इसमें मिठास भी अधिक होती है और रंग भी अच्छा होता है। हालांकि, इसमें चमक दूसरे सेब के मुकाबले थोड़ी कम होती है।
विज्ञापन





रूट स्टॉक के लगाए हैं 1000 पौधे
प्रोमिला शर्मा ने सेब के रूट स्टॉक के 1,000 पौधे लगाए हैं। खास बात यस्है इन पौधों को लगाने के बाद से अभी तक खाद नहीं डाली गई है। इन पौधों को खाद की आदत नहीं डाली गई है। प्राकृतिक खेती से यह आगे विकसित हो रहे हैं। इसके बेहतर परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें