आपदा के बाद चमकने लगा कुल्लू और मनाली का पर्यटन कारोबार
वीकेंड में घाटी के पर्यटन स्थलों में पहुंच रहे 800 पर्यटक वाहन
निजी होटलों में 30, पर्यटन निगम में 40 फीसदी चल रही ऑक्यूपेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। तीन महीने की मायूसी और सन्नाटे के बाद कुल्लू-मनाली की पहाड़ियों में एक बार फिर रौनक लौट आई है।
अंतरराष्ट्रीय दशहरा की दस्तक और बर्फबारी की सौगात ने पर्यटन कारोबार को जैसे नई जान दे दी है। वीकेंड में घाटियों में पहुंच रहे 800 से अधिक पर्यटक वाहन, होटलों में 30 से 40 प्रतिशत तक ऑक्यूपेंसी और ऑनलाइन बुकिंग का दौर इस बात का संकेत हैं कि कुल्लू फिर से मुस्कुरा रहा है।
मनाली, पार्वती, बंजार और तीर्थन घाटी में होटलों और होम स्टे की ऑक्यूपेंसी 25 से 30 फीसदी पहुंच गई है। पहाड़ों पर बर्फबारी से भी पर्यटकों ने स्नो पॉइंटों का रुख कर लिया है। पर्यटन कारोबारियों में दिवाली में सीजन में और उछाल आने की उम्मीद है।
तीन माह तक सुनसान पड़ी पर्यटन नगरी मनाली के साथ लाहौल के सिस्सू, कोकसर, मणिकर्ण, बंजार के जलोड़ी दर्रा की रौनक गायब हो गई थी। अब इन जगहों पर सैलानियों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है। छोटे-बड़े होटलों, होमस्टे के अलावा पर्यटन विकास निगम के होटलों में बेहतर कारोबार चल रहा है। कारोबारियों के चेहरे खुशी आने लगी है।
मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर ने कहा कि एक सप्ताह से पार्वती घाटी में सैलानियों का आना शुरू हो गया है। आपदा के समय भुंतर्र-मणिकर्ण के जछनी में पास दो बैली ब्रिज लगने से सैलानियों का राहत मिली है। घाटी के बागवानों का सेब भी मंडियों में पहुंच रहा है। उन्होंने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि भुंतर-मणिकर्ण सड़क जहां तंग और खराब है, उन पॉइंट को चौड़ा कर सोलिंग और टारिंग की जाए जिससे क्रिसमस, नए साल और विंटर सीजन में आने वाले सैलानियों को दिक्कत न हो। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग का दौर शुरू हो गया है।
हिमाचल पर्यटन विकास निगम मनाली के डीजीएम बीएस ओकटा ने बताया कि निगम के होटलों में अच्छा काम चल रहा है। 35 से 40 फीसदी ऑक्यूपेंसी चल रही है। आगे के लिए उनके पास बुकिंग भी आ रही है।