मौसम अनुकूल रहने से कुल्लू जिले के बागवानों को इस बार बंपर पैदावार होने की उम्मीद
विभाग बोला- फरवरी में हुई बर्फबारी बनी संजीवनी, 25 से 30 फीसदी अधिक होगी फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। जिले की ऊझी घाटी के बगीचे इन दिनों सेब की फसल से लहलहा उठे हैं। मौसम अनुकूल रहने से सेब का आकार भी तेजी से बढ़ रहा है। सेब का आकार खुमानी के बराबर हो गया है। बागवानी विभाग ने इस साल 25 से 30 प्रतिशत अधिक फसल होने का अनुमान लगाया है।
कुल्लू घाटी की नगदी फसल सेब का वर्ष भर बागवानों को इंतजार रहता है। इसी फसल पर 90 फीसदी से अधिक लोगों की आर्थिकी निर्भर है। हालांकि, बागानों में सेब की फसल अप्रैल से फूल खिलने की अवस्था से लेकर जब तक सेब देश की मंडियों तक नहीं पहुंच जाती, तब तक बागवानों को कई प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं सहित विभिन्न समस्याओं से गुजरना पड़ता है।
इस वर्ष फरवरी में हुई बर्फबारी सेब के लिए वरदान बनी है। सेब की अच्छी पैदावार के लिए 1200 से 1600 घंटे चिंलिंग ऑवर्स की जरूरत रहती है। सेब पौधे के लिए तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से कम रहना चाहिए। अब पेड़ों में फल दिखने लगे हैं। बागवान भी सेब बगीचों में दवाइयों के छिड़काव में जुट गए हैं। प्रगतिशील बागवान नकुल खुल्लर ने बताया कि इस बार सेब की बंपर पैदावार है। समय-समय पर हो रही बारिश सेब का आकार बढ़ाने में मदद कर रही है। आजकल सेब का आकार खुमानी के बराबर हो गया है। बागवान प्रेम शर्मा ने बताया कि इस वर्ष मौसम मेहरबान रहा है। सर्दियों में अच्छी बर्फबारी हुई है। अब समय समय पर बारिश भी हो रही है। इससे सेब की गुणवत्ता भी अच्छी होगी। उम्मीद है कि इस साल पिछले साल की तुलना अच्छी फसल होगी। बागवानी विभाग के उप निदेशक उत्तम पराशर ने बताया कि इस साल बंपर पैदावार है। मौसम ने साथ दिया तो पिछले साल की तुलना लगभग 25 से 30 प्रतिशत अधिक फसल होगी।