अब बिना एमबीबीएस डॉक्टरों के कोई भी लैब नहीं चलेगी। इससे जिले में बिना डॉक्टर चल रही छह लैब बंद हो जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने जिला की छह लैबों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग की इस कार्रवाई के बाद लैब संचालकों में हड़कंप मच गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-2010 के तहत इस तरह के चलने वाली लैबों को बंद करने को कहा है। एक्ट के अनुसार उन्हीं लैबों को चलने की अनुमति है जहां एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती हो, लेकिन कुल्लू जिला में स्वास्थ्य विभाग के लाइसेंस नवीनीकरण के दौरान करीब छह लैब में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं पाए गए हैं।
जांच के दौरान मानकों पर खरा न उतरने पर जिला स्वास्थ्य विभाग ने कुल्लू, मनाली, पतलीकूहल आदि स्थानों पर छह लैबों को नोटिस जारी कर बंद करने को कहा है। उधर, लैबों में स्वास्थ्य विभाग के एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-2010 के तहत मानक पूरा न करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डा. वाईडी शर्मा ने बताया कि अब लैब इंचार्ज मात्र बीएससी व एमएससी नहीं होगा बल्कि एमबीबीएस होना चाहिए।
ऐसी लैबों को नोटिस भेजकर बंद करने को कहा गया है। जल्द स्वास्थ्य विभाग इन लैबों का निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-2010 की अनुपालना न करने वाली लैबों पर स्वास्थ्य विभाग नजर रखे हुए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले लैब संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शुरूआती दौर में स्वास्थ्य विभाग ने एक्ट के तहत सभी संस्थानों का पंजीकरण किया। उसके बाद अस्थायी प्रमाण पत्र भी जारी किए। रिन्यूअल के समय पर मानकों की गहनता से जांच परख की गई। उसके बाद मानक पूरे न करने वाली लैबों के विरुद्घ नियमानुसार कार्रवाई की गई है।