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Kullu News: खतरे की जद में शाक्टी-मरौड़ गांव, सुरक्षा के लिए नहीं हुए इंतजाम

Wed, 23 Apr 2025 06:41 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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न्यूली खड्ड के कारण खतरे की जद में मरौड़ गांव। -संवाद
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...पड़ताल
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ग्रामीण आपदा के खौफ में जीने को मजबूर, जुलाई 2023 में न्यूली खड्ड में आई बाढ़ से हुआ था नुकसान
गांवों की सुरक्षा के लिए अभी तक नहीं उठाए गए कदम कदम
महेंद्र पालसरा
न्यूली (कुल्लू)। जिले की सैंज घाटी के दुर्गम गांव शाक्टी और मरौड़ खतरे की जद में हैं। दोनों गांवों की सुरक्षा के लिए न प्रशासन और न जल शक्ति विभाग कोई पहल कर पाया है। प्रशासनिक और विभागीय अनदेखी के कारण सैकड़ों ग्रामीणों को आपदा के खौफ में जीवन-यापन करना पड़ रहा है।
21 माह पहले जुलाई 2023 में न्यूली खड्ड में आई बाढ़ से दोनों गांवों में सरकारी, निजी भूमि और मकानों को भारी नुकसान हुआ था। लेकिन अभी तक गांवों की सुरक्षा को लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
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प्रशासन और जल शक्ति विभाग दोनों गांवों में अब तक सुरक्षा दीवार नहीं लगा पाया है। न्यूली खंड के साथ सटा मरौड़ गांव पूरा का पूरा खतरे की जद में है। गांव पहाड़ी पर स्थित है, यहां खड्ड के किनारे से लगातार भूस्खलन हो रहा है। गांव के कई मकान इस स्थिति में हैं कि वे बरसात के मौसम में भूस्खलन के कारण ढह सकते हैं। वहीं, शाक्टी गांव में भी खड्ड के किनारे स्थित घरों और स्कूल भवनों को नुकसान होने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण हीराचंद, तुले राम, डोला राम, निरत राम, प्रकाश चंद ने कहा कि शाक्टी और मरौड़ गांव बिजली, नेटवर्क और सड़क सुविधा से दूर हैं। आपदा के समय संपर्क कर पाना भी संभव नहीं है, लेकिन आपदा से पूर्व गांवों को बचाने के लिए प्रशासन और विभाग को इंतजाम करने चाहिए। उन्होंने कहा कि 21 माह का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा दीवार तक नहीं लग पाई है। मरौड़ गांव के अस्तित्व को खतरा बना हुआ है। इस संबंध में नायब तहसीलदार सैंज हीरालाल नालवा ने कहा कि जल शक्ति विभाग से मौके की स्थिति की रिपोर्ट ली जाएगी।
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शाक्टी में स्थित राजकीय प्राथमिक, राजकीय माध्यमिक विद्यालय के अलावा आंगनबाड़ी केंद्र के भवन को खतरा बना हुआ है। करीब 21 माह पहले जुलाई 2023 में आई बाढ़ से उपरोक्त भवनों और परिसर में पानी और मलबा भर गया था। इसके अलावा न्यूली खड्ड में आई बाढ़ से ग्रामीणों के सात घर बह गए थे। कई बीघा भूमि भी बाढ़ की जद में आई थी और विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र के भवन को खतरा पैदा हो गया था, लेकिन पिछले 21 माह से प्रशासनिक और विभागीय तौर पर कोई पहल न होने से ग्रामीण परेशान हैं।
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