कुल्लू। देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद करवाने में स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका अहम रही है। इनमें जिला कुल्लू के भी 17 सेनानी शामिल रहे हैं। इनमें एक ने देश के लिए जान की कुर्बानी दी है। वहीं, 16 सेनानियों ने कई-कई वर्षों तक कारावास की यातनाओं को सहा है लेकिन देश की आजादी को सर्वोपरि मानकर साल 1857 से 1947 तक विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रहे। उपमंडल स्तर पर बात करें तो कुल्लू से छह, बंजार से पांच, मनाली से तीन तथा आनी और निरमंड से एक-एक सेनानी ने आजादी के महायज्ञ में आहुति डाली।
गौर रहे कि पहाड़ी रियासतों में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सबसे पहले युवराज कंवर प्रताप सिंह ने साल 1857 ने विरोध का बिगुल बजाया था। उन्होंने कर देना बंद करने के अलावा जंग का ऐलान किया था। अंग्रेजों ने उन्हें धर्मशाला में फांसी दी। अमर चंद सोहल 1930 से डांडी मार्च आंदोलन में शामिल रहे। केसर लाल भी कई आंदोलनों में सक्रिय रहे। गोविंद राम ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। नाथू राम शेरदिल भारत छोड़ो आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा लाहौर में तिरंगा फहराने में कामयाब रहे। परमानंद ठाकुर 1942 से आजाद हिंद फौज में शामिल रहे। फकीर चंद 1920 से विभिन्न आंदोलनों में शामिल रहे। मनसा राम बख्शी स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों में शामिल रहे। मणिराम चौधरी 1942 से आजाद हिंद फौज में शामिल रहे। राधाकृष्ण महाजन 1942 के भारत छोडो आंदोलन में शामिल रहे। रामचंद सूद सत्याग्रह व डांडी मार्च में शामिल रहे। लालचंद प्रार्थी का लाहौर में क्रांतिकारी दल के संपर्क व विद्यार्थी कांग्रेस में सहयोग व भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय योगदान रहा। वह हिमाचल सरकार में मंत्री भी रहे। शिव राम मेहता ने 1930-31 में स्वतंत्रता आंदोलन में सम्मिलित रहकर विदेशी माल का बहिष्कार किया। शिव सिंह ने 1896 में असहयोग आंदोलन में भाग लिया। श्यामानंद ने 1930 में स्वाधीनता आंदोलन, 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भागीदारी निभाई। सुखनंद भी 1939 के स्वतंत्रता आंदोलन में सम्मिलित रहे। इसके अलावा ज्ञानचंद शर्मा ने 1924 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और उन्हें 1942 से 1944 तक दो वर्ष नजरबंद रखा गया। बहरहाल, सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने कारावास में एक से दस वर्षों तक की यातनाएं सही हैं।
कुल्लू के कहां से कौन सेनानी
उपमंडल कुल्लू से युवराज कंवर प्रताप सिंह (बदाह), अमर चंद व मनसा राम (अखाड़ा बाजार), फकीर चंद व शिव सिंह (रघुनाथपुर), केसर (मौहल), ज्ञानचंद शर्मा (ढालपुर), नाथू राम (सरसई), लालचंद प्रार्थी (नग्गर), रामचंद सूद (पतलीकूहल) रहे। इसके अलावा उपमंडल बंजार से गोविंद राम (पुजाली), परमानंद (पलाहच), मणिराम (देहुरी), राधाकृष्ण महाजन (चनौन), शिवराम मेहता (तांदी) रहे। उपमंडल आनी से सुखनंद (चौकी) व उपमंडल निरमंड से श्यामानंद (दरमोट) का नाम से स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में शामिल हैं।
भाषा विभाग के सहयोग से स्वतंत्रता सेनानियों की आपबीती पर डॉक्यूमेंट्री बनाने का अवसर मिला। 16 सेनानियों की डॉक्यूमेंट्री तैयार की है। हालांकि, ऐसे सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानी होंगे, जिनका नाम आज भी इतिहास के पन्नों में दफन है।
-केहर सिंह ठाकुर, प्रसिद्ध रंगकर्मी
भाषा विभाग ने प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों की एक पुस्तक प्रकाशित की है। इसके अलावा जिला स्तर पर डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गई है।
-प्रोमिला गुलेरिया, जिला भाषा अधिकारी