देवभूमि कुल्लू में आजकल सायर मेलों की धूम मची हुई है। हरी दूब की डाली से पर्व का आगाज हो गया है। आगामी पांच दिन तक सायर मेले को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पर्व को लेकर देवरथों को खूब सजाया गया है।
देवी-देवता रथों में विराजमान होकर हारियानों समेत क्षेत्र की परिक्रमा कर रहे हैं। इस दौरान देवता हर घर में जाकर दुखों का निवारण भी कर रहे हैं। वहीं, जिले की महिलाएं भी अपने-अपने मायके जाकर दूब देने की रस्म को निभा रही हैं। संक्रांति के दिन जिलाभर के लोगों ने सबसे पहले देवी-देवता को दूब देने के बाद घर में बुजुर्ग को दूब भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मणिकर्ण घाटी के पाथला में देवता अग्निपाल के सम्मान में शौयरी (सायर) मेला मनाया जा रहा है। शुक्रवार को देवता ने जरी तथा आसपास के गांवों की परिक्रमा की। इसके अलावा पांच हारियान क्षेत्र हुरण, धारला, शराणी बेहड़, शांगचण, टील, टारवाई में माता रूपासना के सम्मान में शौयरी (सायर) मेला मनाया गया।
कटोभा में माता कैलाशना की अगुवाई में मेला मनाया गया। इसके अलावा पड़ेई में माता भंटती के सम्मान में सायर मेले की धूम है। वहीं, बनाऊगी में भी देवता कौशू नारायण के सम्मान में मेला धूमधाम से मनाया गया। वहीं, तांदला गांव में देवता थिरमल के सम्मान में मेले को मनाया जा रहा है। शनिवार को देवविधि के अनुसार मेला संपन्न हो गया। सायर मेले में कौशू नारायण के दर्शन के लिए दूर-दर से श्रद्धालु पहुंचे। माता रूपासना के कारदार लाल चंद ने बताया कि सायर पर्व पर माता ने पांच हारियान क्षेत्र की परिक्रमा की। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर का कहना है कि सायर मेला देवभूमि कुल्लू का मुख्य पर्व है।