देवी बोटी सहित स्वर्ग प्रवास से लौटेंगे लाहौल के देवी देवता
अपने गुर के माध्यम से राजा घेपन करेंगे सालभर की भविष्यवाणी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। हालडा और ड्रन उत्सव समाप्त होने के बाद चंद्रावैली में पूणा उत्सव देवताओं के स्वर्ग प्रवास से वापसी पर मनाया जाता है। 12 फरवरी से देवी बोटी के गांव रोपसंग में पूणा का आगाज हो रहा है।
इस दिन से देवी बोटी सहित राजा घेपन सहित चंद्रा घाटी के देवी देवता स्वर्ग प्रवास से लौटेंगे। देवताओं की अगुवाई के लिए ग्रामीण गूर और पुजारी के माध्यम से देवी-देवताओं का आह्वान करेंगे।
सिस्सू पंचायत के पूर्व प्रधान एवं राजा घेपन के हरुका जगदीश कटोच ने बताया कि 12 फरवरी को पोपुण के नाम से रोपसंग में देवी बोटी के पुजारी और हरुका ग्रामीणों के साथ पूजा-अर्चना करेंगे। दूसरे दिन फेजी पूजा के बाद घेपन के पुजारी शाशिन मंदिर पहुंचेंगे। इस दिवस को देवताओं का फेफछंग अर्थात स्वागत समारोह के रूप में मनाया जाता है। 19 फरवरी को जगदंग पूणा का आगाज कोरतुम से होगा। यंगलिंग में इसका समापन होगा। दूसरे दिन 20 फरवरी को पोपुणा मनाया जाएगा। इस दिन भी देवी देवताओं की पूजा होगी। तीर कमान का प्रयोग कोरतुम के दिन से ही शुरू हो जाता है, जो पूरे पूणा समाप्त होने तक चलता है। इसी दिन माता पलदन लामो का आह्वान होता है। 21 फरवरी को लमोई का महत्वपूर्ण उत्सव मनाया जाएगा। यंगलिंग घेपन थान में सुबह सूर्य की किरण के साथ लामो योरे के रूप में यंगलिंग जगदंग के हर घर से पुरुष सदस्य इस यात्रा में भगा लेकर सिस्सू गांव की ओर प्रस्थान करते हैं। लामो योरे की यात्रा बठबाण की साथ संपन्न होती है। घेपन अपने गूर के माध्यम से वर्षभर की भविष्यवाणी करते हैं, जिसका सभी को इंतजार रहता है।