मकानों के साथ कृषि भूमि पर भी मंडरा रहा खतरा, स्थिति पर प्रशासन की नजर
पार्वती परियोजना प्रबंधन को डैम से पानी के बहाव को नियंत्रित करने के आदेश
सायरन सिस्टम भी सक्रिय रखने, स्थानीय लोगों को खतरे से सूचित करने को कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सैंज घाटी के जीवा नाला पर भूस्खलन के बाद बनी कृत्रिम झील अब धीरे-धीरे खतरे का संकेत देने लगी है। शरण बिहाली क्षेत्र में बनी इस झील से 18 मकानों और आसपास की कृषि भूमि को खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित घरों को खाली कराने के निर्देश दे दिए हैं। झील से फिलहाल पानी का बहाव सामान्य है लेकिन अधिक बारिश या मलबे से रास्ता बंद होने की स्थिति में तेज बहाव की आशंका जताई जा रही है। पार्वती परियोजना प्रबंधन को भी डैम से पानी के बहाव को नियंत्रित करने और सायरन सिस्टम को सक्रिय रखने को कहा गया है जिससे किसी भी स्थिति में लोगों को समय पर अलर्ट किया जा सके। ग्राम पंचायत रैला-एक, रैला-दो के प्रतिनिधियों सहित पटवारियों से कहा गया है कि वे संभावित खतरे के बारे में स्थानीय निवासियों को सूचित करें। जिला प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।
गौर रहे कि जीवा नाला के शरण बिहाली नामक स्थान के पीछे नाले में कृत्रिम झील बन गई है। इसका पानी तेज प्रवाह के साथ आ सकता है। हालांकि झील का पानी पार्वती प्रोजेक्ट के डैम में जाएगा। अधिक पानी होने की स्थिति में डैम से पानी छोड़ना पड़ सकता है। प्रशासन ने कृत्रिम झील में एकत्रित पानी के बहाव को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं जिससे किसी तरह के जानमाल का नुकसान न हो। प्रोजेक्ट प्रबंधन को उपलब्ध संचार माध्यम सायरन सिस्टम को दुरुस्त रखने के साथ ही लोगों को तुरंत सतर्क करने को कहा गया है।
उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने कहा कि जीवानाला में बनी कृत्रिम झील से संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन की ओर से चेतावनी जारी की गई है। कृत्रिम झील से 18 मकानों और कृषि भूमि को खतरा है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संभावित खतरे के जद में मकानों को एहतियात के तौर पर खाली कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना सुनिश्चित करें।