सैंज घाटी में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ बुजुर्गों और मरीजों को हो रही है परेशानी
पीडब्ल्यूडी का दावा- बस योग्य बनाई सड़क, निगम बोले- मंजूरी मिलते ही शुरू होगी सेवा
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। चार महीने पहले आई प्राकृतिक आपदा ने सैंज घाटी की सड़कें तो तोड़ दीं लेकिन अब हालात यह हैं कि सड़कें ठीक होने के बावजूद जिंदगी की रफ्तार थम गई है।
सैंज-कनौन रूट पर एचआरटीसी की बस सेवा ठप रहने से छोटे बच्चे पैदल स्कूल जा रहे हैं। मरीज महंगी टैक्सियों पर निर्भर हैं। आम ग्रामीण हर दिन अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठा रहे हैं।
हालांकि, सड़क का मरम्मत कार्य लोक निर्माण विभाग ने लगभग पूरा कर दिया है लेकिन अभी निगम की बस सेवा शुरू नहीं हो पाई है। इससे विद्यार्थियों, प्रशिक्षुओं, मरीजों के अलावा आम जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बस बंद होने से छोटे बच्चों को रोजाना विद्यालय पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी बस इस क्षेत्र की जीवनरेखा है। बस बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। छोटे बच्चों को अकेले भेजना सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिम भरा हो रहा है। कामकाजी लोग, बुजुर्ग और मरीज भी प्रभावित हो रहे हैं। बस न चलने से अस्पताल, बाजार और दफ्तर जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई तो वे कहते हैं कि सड़क की मरम्मत कर दी गई है और यह बस चलाने योग्य है। उधर, परिवहन निगम के अधिकारी से भी बस संचालन की अपील की गई है लेकिन बस सेवा ठप है। उधर, बस अड्डा प्रभारी औट भुवनेश्वर ने कहा कि मौके की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। अनुमति मिलते ही बस सेवा शुरू कर दी जाएगी।
सैंज से कनौन के लिए बस सेवा ठप होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और मरीजों को ज्यादा परेशानी हो रही है। रोजाना टैक्सी का किराया देना ग्रामीणों की जेब पर कैंची चला रहा है। - कुंदन लाल, अध्यक्ष, सेवार्थ युवा जागृति मंडल कनौन।
आपदा को महीनों बीत गए हैं लेकिन लोक निर्माण विभाग और परिवहन निगम गहन निद्रा में हैं। सैंज-कनौन रूट पर बस सुविधा नहीं मिल रही है। इस वजह से विद्यार्थी, मरीज और आम जनता पर समस्याओं के साथ आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। -प्रशांत, स्थानीय निवासी