लाहौल के जाहलमा नाला में बाढ़ के बाद वैकल्पिक मार्ग पर गुजरते वाहन।-संवाद
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। संसारी-किलाड़-थिरोट-तांदी (एसकेटीटी) सड़क पर स्थित जाहलमा नाला 47 घंटे बाद बुधवार दोपहर करीब 1:15 बजे छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल किया गया, लेकिन राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। शाम करीब 4 बजे नाले का जलस्तर अचानक बढ़ने से बीआरओ को सुरक्षा के मद्देनजर मार्ग फिर से बंद करना पड़ा।
इससे सब्जियों के सीजन में किसानों, बागवानों और स्थानीय लोगों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है। 29 जून को दोपहर 2:15 बजे नाले में आई बाढ़ से अस्थायी सड़क बह गई थी, जिससे लाहौल की 14 पंचायतों और पांगी घाटी का संपर्क प्रभावित हो गया था।
बुधवार को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने दो से तीन मशीनों और श्रमिकों की मदद से नाले में चार आरसीसी पाइप बिछाकर अस्थायी सड़क तैयार की। इसके बाद छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हुई और किसानों, बागवानों तथा स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
सड़क बंद रहने के दौरान किसानों को सब्जियां और हरे मटर की फसल मजदूरों के माध्यम से पीठ पर उठाकर दूसरी ओर पहुंचानी पड़ी, जिससे परिवहन लागत बढ़ने के साथ आर्थिक नुकसान भी हुआ।
हालांकि मार्ग खुलने के करीब ढाई घंटे बाद ही नाले का जलस्तर फिर बढ़ गया और अस्थायी सड़क पर खतरा पैदा हो गया। स्थिति को देखते हुए बीआरओ ने एहतियातन वाहनों की आवाजाही रोक दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था बार-बार बाढ़ की चपेट में आ रही है, इसलिए यहां स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
सीमा सड़क संगठन की 94 आरसीसी के ओसी मेजर पारस ने बताया कि दोपहर में मार्ग बहाल कर दिया गया था, लेकिन शाम 4 बजे जलस्तर बढ़ने के कारण सुरक्षा के दृष्टिगत यातायात रोक दिया गया। जैसे ही परिस्थितियां सामान्य होंगी, सड़क को दोबारा यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।