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Kullu News: बारिश ने छीनी फूलगोभी-मटर, अब आलू ही आखिरी सहारा

Fri, 12 Sep 2025 11:09 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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लाहौल के खेतों में तबाह हुए गोभी के फसल ।-संंवाद
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जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में खेतों में ही सड़ गई किसानों की नगदी फसल
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कृषि और बागवानी पर निर्भर हैं घाटी के लगभग 90 फीसदी परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी

केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिले के किसानों की मेहनत इस बार भारी बारिश और बाढ़ की मार झेल रही है। फूलगोभी और मटर की फसल खेतों में ही सड़ गई है। इससे लाखों का नुकसान हुआ है।
इससे मजदूरी और बीज का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। कटते रास्ते और बंद मंडियों ने किसानों की तंगी को और गहरा दिया है। मंडियों तक सड़क बंद रहने और बाजार में सही दाम न मिलने से किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है। उनकी बची-खुची उम्मीदें आलू की फसल पर टिकी हैं। देशभर में अपनी खासियत रखने वाला लाहौली आलू कठिन घड़ी में किसानों की आखिरी उम्मीद बनकर उभरा है। यह उनके लिए दो वक्त की रोटी का सहारा साबित हो सकता है।
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घाटी के लगभग 90 फीसदी परिवार अपनी आर्थिकी के लिए कृषि और बागवानी पर निर्भर हैं। सालभर में केवल एक ही फसल चक्र होने से इस बार बाढ़ और बारिश ने किसानों को गहरे जख्म दिए हैं। घाटी में करीब पांच हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती हो रही है। किसानों का कहना है कि अगर फसल पकने तक सड़कें बहाल हो जाएं और मंडियों में हालात सुधरें तो उन्हें बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। किसान प्रेम लाल, रमेश, रोहित, छेरिंग और राजेश ने बताया कि गोभी और मटर की फसल बर्बाद होने से मजदूरी और बीज का खर्च तक नहीं निकल पाया। आलू से ही अब उम्मीद है कि इस बार दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पाएगा।
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जिला कृषि अधिकारी मुंशी राम ठाकुर ने बताया कि इस बार विभाग ने किसानों को एक हजार क्विंटल बीज आलू वितरित किया है। किसानों ने कई हजार क्विंटल बीज निजी कंपनियों से भी खरीदा हैं। लाहौल का आलू देशभर में अपनी गुणवत्ता के लिए मशहूर है। उम्मीद है कि इस बार किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।
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