भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के चलते कुल्लू के साहसिक पर्यटन को लगा बड़ा झटका
ब्यास नदी में 450 की जगह उतर रहीं 170 राफ्टें, पैराग्लाइडिंग करने भी आ रहे कम सैलानी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के चलते कुल्लू के साहसिक पर्यटन को बड़ा झटका लगा है। पर्यटन सीजन के बीच ब्यास नदी की धारा में राफ्टों की संख्या आधे से कम रह गई है।
इसका असर जिला कुल्लू और सूबे के करीब 10,000 उन लोगों पर पड़ा है, जो इस कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। 450 की जगह अब 170 राफ्टें ब्यास नदी में उतर रही हैं। पैराग्लाइडिंग साइटों में भी गिने-चुने सैलानी पहुंच रहे हैं। आसमान में पैराग्लाइडर भी गिनती के ही उड़ रहे हैं।
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद घाटी में सैलानियों की संख्या बढ़ी थी, मगर भारत-पाकिस्तान तनाव से कारोबार में कमी आई है। कुल्लू-मनाली के पर्यटन को झटका लगा है। इसका नुकसान साहसिक पर्यटन पर पड़ा है। कुल्लू में सैर-सपाटे के लिए आने वाले सैलानी साहसिक पर्यटन का खूब आनंद लेते हैं। मई का आधा महीना बीत चुका है। इन दिनों जिले में पर्यटन कारोबार पूरे यौवन पर होता था। इस बार एक माह से पर्यटन सीजन गति नहीं पकड़ पाया है।
साहसिक खेलों से जुड़े कारोबारी मायूस
जिले के साहसिक खेलों से जुड़े कारोबारियों के चेहरों पर मायूसी है। कुल्लू घाटी में रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग के साथ सैलानी रिवर क्राॅसिंग, ट्रैकिंग, क्लाइंबिंग आदि साहसिक गतिविधियां का पूरा अनुभव लेकर जाते हैं। जानकारी के अनुसार जिले में करीब 620 राफ्टें और 500 पैराग्लाइडर पंजीकृत हैं। रिवर राफ्टिंग एसोसिएशन कुल्लू के अध्यक्ष श्याम अत्री ने कहा कि मई से साहसिक पर्यटन में भारी कमी आई है। कहा कि आजकल ब्यास में 170 राफ्टें उतर रही हैं।