पतलीकूहल में किसान सभा के सदस्य कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन करते हुए।
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कुल्लू। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर जनवादी संगठनों हिमाचल किसान सभा, सीटू, नौजवान सभा और एसएफआई ने संयुक्त रूप से पतलीकूहल में प्रदर्शन किया। हिमाचल किसान सभा के सह सचिव होतम सिंह सौंखला ने कहा कि केंद्र सरकार ने महामारी की आड़ में बिना संसद में चर्चा किए अध्यादेश लाकर तीन कृषि कानून पास किए। यह देश के किसानों के विरोध में हैं।
उन्होंने कहा कि पूंजीपतियों के पक्ष में बनाया कानून देश के 85 फीसदी छोटे किसानों को बरबाद करने वाला है। इन कानूनों के चलते देश में सरकारी मंडियों का अस्तित्व समाप्त होगा। मंडियां समाप्त होने से पूंजीपतियों और कंपनियों की मनमानी होगी। ठेका खेती कानून से किसान और कंपनी के बीच विवाद होने पर किसानों को न्यायालय जाने का अधिकार नहीं रहेगा।
किसान कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। मोदी सरकार इस बिल को निरस्त करने में आनाकानी कर रही है। उन्होंने मांग की कि तीनों किसान विरोधी कानूनों को वापस लिया जाए। हिमाचल किसान सभा नग्गर ब्लॉक सचिव अनिल कुमार ने कहा कि अगर सरकार के साथ बातचीत से हल नहीं निकलता है तो कुल्लू से भी किसान जल्द ही दिल्ली की ओर कूच करेंगे। इस दौरान सीटू जिला कोषाध्यक्ष भूप सिंह भंडारी, महिला समिति की सह संयोजक ममता नेगी, नौजवान सभा के नेता गोविंद भंडारी, सुनील ठाकुर, हिमाचल किसान सभा मनाली ब्लॉक के प्रधान चमन लाल, सचिव अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।