कुल्लू। निजी स्कूलों में मनमानी फीस पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लाए स्कूल फीस बिल के विरोध में निजी स्कूल उतर गए हैं। बुधवार को इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन ने आपत्तियां उपायुक्त और शिक्षा उपनिदेशक को सौंपी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. गुलशन कुमार ने कहा कि यह बिल शिक्षा का गला घोंटने का काम करेगा। इसमें निजी स्कूलों को कोर्ट जाने का अधिकार नहीं है। निजी गैर सहायता वाले स्कूलों की फीस को सरकार नियंत्रित नहीं कर सकती। हर स्कूल अपनी-अपनी सुविधाओं के आधार पर फीस लेता है। अगर सरकार यह बिल लाती है तो लगभग सभी स्कूल बंद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिना फीस के निजी स्कूल नहीं चल सकते। प्रदेश सरकार निजी स्कूलों को भी प्रोसाहित करे। जिससे हिमाचल प्रदेश शिक्षा का केंद्र बने। रॉकवेल पब्लिक स्कूल की एमडी वर्षा ठाकुर ने कहा कि इस मसले को शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर के समक्ष भी रखा जाएगा। निजी स्कूलों ने सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन किया है। लेकिन सरकार निजी स्कूल संचालकों की परेशानियों को भी समझे। शिक्षा को सरकारी और निजी स्कूलों में दोफाड़ नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश के 50 फीसदी निजी स्कूल रीढ़ की हड्डी हैं। जिला कुल्लू में ही इस समय 250 निजी स्कूल चल रहे हैं। इनमें सैकड़ों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कोरोना के बीच इनमें पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रही। ऐसे बिल के चलते इन्हें सरकार पिछड़ने न दे। इस दौरान कुल्लू कान्वेंट स्कूल के एमडी सुरेश कुमार आदि भी मौजूद रहे।
उपायुक्त के माध्यम से शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा
वहीं, निजी स्कूल संगठन ने बुधवार को सरकार और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा मांगे गए सुझाव को लेकर उपायुक्त के माध्यम से शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा। जिसमें संगठन ने फीस बढ़ाने के मामले को लेकर सरकार से फीस की न्यूनतम सीमा स्कूलों के व्यय और अध्यापकों के वेतन को ध्यान में रखते हुए तय करने की मांग की है। इस दौरान निजी स्कूल संगठन अध्यक्ष पूर्ण चंद ठाकुर, महासचिव गणेश भारद्वाज, उपाध्यक्ष वर्षा ठाकुर, मुख्य सलाहकार निरंजन देव शर्मा, सलाहकार मोती लाल शर्मा आदि उपस्थित रहे।