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अग्निकांड के बाद एक टरबाइन में बिजली उत्पादन को कवायद तेज

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सैंज (कुल्लू)। एनएचपीसी की 800 मेगावाट की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-दो ने चार में से एक टरबाइन में बिजली उत्पादन करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। बीते सप्ताह नवनिर्मित पावर हाउस में आग लगने से बंद बिजली उत्पादन को शुरू करने के लिए नए उपकरण लगाए जा रहे हैं।
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सोमवार को कंपनी की विशेषज्ञ टीम ने पावर हाउस का दौरा कर एक टरबाइन को फिर शुरू करने की संभावनाएं देखीं। तकनीकी टीम को उपकरण स्थापित करने में लगा दिया गया है। कंपनी के महाप्रबंधक ललितेंदु त्रिपाठी साइट पर काम की मॉनिटरिंग करने के साथ फरीदाबाद मुख्य कार्यालय को रिपोर्टिंग भी कर रहे हैं। कंपनी प्रबंधन आग की इस घटना को परियोजना की प्रगति में बड़ी बाधा मान रहे हैं।
गौर रहे कि वर्ष 2001 के मूल्य स्तर पर पार्वती-दो की अनुमानित लागत 3920 करोड़ थी। जो आज 9000 करोड़ के आसपास पहुंच गई है। हाईडल प्रोजेक्ट के पूर्ण होने पर आंकड़ा 12000 करोड़ के आसपास तक पहुंच सकता है। वर्ष 2001 से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का शुरुआती उत्पादन लक्ष्य वर्ष 2007 रखा गया था। लेकिन निर्माण कार्य में आई बाधा के चलते लक्ष्य वर्ष 2010 तक खिसक गया। पार्वती-दो के सियूंड पावर हाउस पर पहाड़ी गिरने से नया टारगेट वर्ष 2014 निर्धारित किया गया। लेकिन 32 किलोमीटर लंबी हेडरेस टनल में फंसी टीबीएम मशीन ने टारगेट को वर्ष 2018 तक खिसका दिया। एनएचपीसी ने प्रोजेक्ट के उत्पादन लक्ष्य को वर्ष 2018 में पूरा करने का दावा किया था। लेकिन जिस गति से प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य चल रहा है। उससे लग रहा है कि यह परियोजना 2022 तक ही बिजली उत्पादन शुरू करेगी। प्रतिवर्ष 3108.66 लाख मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन करने वाली पार्वती दो से प्रदेश सरकार को सालाना 9078 करोड़ का राजस्व मिलना है। राज्य सरकार को हर वर्ष 140 करोड़ की रॉयल्टी मिलेगी। पार्वती प्रोजेक्ट से हर वर्ष 500 करोड़ बह रहे हैं। इससे बडे़ पैमाने पर आर्थिक नुकसान हो रहा है। एनएचपीसी के महाप्रबंधक ललितेंदु त्रिपाठी ने कहा कि पावर हाउस को चालू करने के लिए नए उपकरण मंगवाए गए हैं। विशेषज्ञों की टीम काम पर लगा दी गई है।
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