लाहौल-स्पीति के केलांग क्षेत्र में पवित्र पर्वत ड्रिलबुरी की परिक्रमा के दौरान बर्फबारी के बीच
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। खराब मौसम और बर्फबारी के बीच हुई पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा के दौरान फंसे सैकड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए लाहौल-स्पीति पुलिस ने रेस्क्यू अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक शिवानी मेहला के निर्देश पर पुलिस जवानों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच मौके पर पहुंचकर श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला।
रेस्क्यू अभियान के दौरान पुलिस जवानों को बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पुलिस ने स्थानीय लोगों के सहयोग से कई फंसे सैकड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। अभियान के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस टीमों ने लगातार मोर्चा संभाले रखा।
रेस्क्यू अभियान में स्थानीय लोगों ने भी पुलिस का सहयोग किया। स्थानीय लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में श्रद्धालुओं की मदद के लिए पुलिस की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना की। लोगों ने कहा कि खराब मौसम के बीच पुलिस जवानों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ड्रिलबुरी पर्वत का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
जिला मुख्यालय केलांग के साथ सटी ड्रिलबुरी पर्वत का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। यह पर्वत लाहौल के बौद्ध समुदाय के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है। इसकी परिक्रमा को पुण्यकारी धार्मिक यात्रा के रूप में देखा जाता है। स्थानीय मान्यताओं में यह क्षेत्र बौद्ध आध्यात्मिक परंपरा और हिमालयी साधना से जुड़ा माना जाता है। ऊंचाई, बर्फबारी और दुर्गम पहाड़ी भूभाग के बावजूद श्रद्धालु परिक्रमा के लिए यहां पहुंचते हैं। यात्रा को आध्यात्मिक साधना और आस्था की परीक्षा के रूप में भी देखा जाता है।
ड्रिलबुरी पर्वत लाहौल की पुरानी बौद्ध संस्कृति, स्थानीय लोक विश्वास और पारंपरिक धार्मिक जीवन का हिस्सा रहा है। इसकी परंपराएं पीढ़ियों से स्थानीय समुदायों में चली आ रही हैं। ड्रिलबुरी केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि लाहौल की बौद्ध आस्था, आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा पवित्र स्थल है।