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मणिकर्ण हादसे से सहमे लोगों ने छोड़े घर

Thu, 20 Aug 2015 10:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
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कुल्लू। मणिकर्ण में विपदा का ऐसा पहाड़ टूटा कि स्थानीय निवासियों को अपनी जन्मभूमि छोड़ कर दूसरों के घरों में शरण लेनी पड़ी। कई परिवार घर और जमीन छोड़कर मणिकर्ण से बाहर निकल गए हैं। प्रशासन को मिली रिपोर्ट में पाया गया है कि पहाड़ी के ऊपर अभी दो और चट्टानें कहर बरपाने को तैयार हैं। कई लोगों को प्रशासन ने हटाया है तो कई अपने स्तर पर ही खतरे को भांपते हुए अपने घरों को छोड़ गए।
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गौरतलब है कि मणिकर्ण गुरुद्वारा इमारत पर करीब ढाई किलोमीटर की दूरी से चट्टान गिरने के कारण सात लोगों की मौत हो गई है, जबकि ग्यारह लोग घायल हुए हैं। एनडीआरएफ की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अभी पहाड़ी पर दो और चट्टानें कहर बरपाने को तैयार हैं। प्रशासन ने भी खतरे को भांपते हुए लोगों को सावधान रहने को कहा है। जानकारी के मुताबिक इन आठ परिवारों के करीब चालीस सदस्य हैं।

खतरे को भांपते हुए इन परिवारों में से कुछ परिवार मणिकर्ण को छोड़कर सुरक्षित जगह के लिए निकल गए हैं। यही नहीं, कुछ परिवार डर से दो से तीन किलोमीटर दूर किसी तरह रातें गुजारने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि कई परिवारों के तो दूसरे गांवों में जमीन और घर हैं, लेकिन कई ऐसे भी परिवार हैं जिनके पास और कोई साधन नहीं है। इन्हें दूसरों के घरों में जाकर शरण लेनी पड़ी है। हादसे को तीन दिन बीत चुके हैं। इन परिवारों की नींद हराम हो गई है।
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राजस्व विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक विक्रम चंद का घर हादसे में पूरी तरह ध्वस्त को चुका है। इसके अलावा बाला राम, दुनी चंद, चंदू, रोशन लाल, देवी सिंह, हीरा लाल और रामदेई के घरों को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। ये परिवार बेघर हो चुके हैं। वहीं, गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने एक घर बगीचे में बनाया था, उसे भी खाली करवा दिया गया है। इन परिवारों के करीब चालीस सदस्य हैं।
इधर, तहसीलदार भुंतर एसपी जसवाल ने बताया कि करीब आठ घरों को खतरा पैदा हो गया है। ये घर खाली करवा दिए गए हैं। राजस्व विभाग की टीम को मौके पर तैनात कर रखा है, जिससे लोग खतरे वाले स्थान की ओर जाएं।
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